- करीब दो साल पहले ज़िले की कई स्कूलों, आश्रम, हॉस्टल में पॉक्सो बॉक्स लगाए
- लेकिन ये सिर्फ स्कूलों में शो पीस बने हुए हैं, अधिकाश बच्चों को इनकी जानकारी भी नहीं
Dainik Bhaskar
Mar 01, 2020, 01:47 AM IST
दंतेवाड़ा . जिले की शैक्षणिक संस्थाओं में वैसे तो छिटपुट मामले सामने आते ही हैं, लेकिन महीने भर के अंदर यहां की 3 शैक्षणिक संस्थाओं के 3 बड़े मामलों ने परिजनों की नींद ही उड़ा दी है। इनमें से दो मामले तो पॉक्सो से जुड़े हुए हैं। इनमें से एक ट्राइबल विभाग की संस्था का सबसे बड़ा मामला है। शिक्षा के मंदिर में लगातार सामने आए बड़े मामलों से परिजनों की चिंता काफी बढ़ गई है। इधर इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। करीब दो साल पहले ज़िले की कई स्कूलों, आश्रम, हॉस्टल में पॉक्सो बॉक्स ज़रूर लगाया गया है। ताकि बच्चे खुद से, दोस्तों से या आसपास घटी किसी भी घटना की जानकारी देने पत्र लिखकर बॉक्स में डाल सकें। लेकिन ये सिर्फ स्कूलों में शो पीस बने हुए हैं। कई जगह बच्चों को यह तक नहीं पता है कि इस बॉक्स का क्या उपयोग है।
महीनेभर के अंदर ये मामले सबसे ज़्यादा चर्चित रहे, जिन्हें दबाने का भरसक प्रयास हुआ, जिसे सुनकर हर परिजन का दिल दहल रहा है
केस 1 – 17 जनवरी 2020 को कन्या शिक्षा परिसर पातररास की एक छात्रा ने हॉस्टल में एक बच्चे को जन्म दिया था। छात्रा 9 महीने से गर्भवती थी, सबसे ज़्यादा वक़्त हॉस्टल में निकाला लेकिन संस्था के किसी भी कर्मचारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। दबाए जा रहे मामले का भास्कर ने सबसे पहले खुलासा किया। अधीक्षिका सस्पेंड हुई। जांच हुई। इस मामले ने प्रबन्धन के साथ ही विभागीय अफसरों पर भी सवाल खड़े किए। प्रेम प्रसंग का मामला बताकर मामले में एक बार फिर लीपापोती का प्रयास हुआ। शुक्रवार को जब विधानसभा में विपक्षियों ने मामला उठाया तो डेढ़ महीने बाद आनन- फानन में एफआईआर दर्ज कराई गई। कोतवाली पुलिस ने वर्तमान अधीक्षिका के आवेदन पर 28 तारीख को पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
केस 2 – 31 जनवरी को बारसूर के नवोदय विद्यालय के मामले ने परिजनों के एक बार फिर होश उड़ा दिए। यहां के शिक्षक पर ही दो मासूम छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोप लगे। पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। अब आरोपी शिक्षक भी पुलिस गिरफ्त में है। लेकिन इस मामले के बाद यहां शिक्षक व बच्चों की जमकर राजनीति भी हुई। शिक्षक के पक्ष में बच्चे उतरे तो इधर इस बात से खफा कई बच्चों को घर भेजा गया। करीब 10 दिनों तक यहां का माहौल काफी खराब रहा।
केस 3 – 12 फरवरी को डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल जावंगा के एक बच्चे को 4 शिक्षकों ने मिलकर बुरी तरह पीटा था। घटना के बाद माहौल काफी गर्म रहा, बवाल बढ़ता देख , चारों शिक्षकों को प्रबंधन ने बर्खास्त कर दिया। इस घटना के बाद परिजन काफी खफा रहे। अब इस मामले की बाल आयोग भी जानकारी ले रहा है।
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