Chhattisgarh News In Hindi : In Chhattisgarh Assembly, the issue of sterilization scandal arose, Health Minister suspends two employees | विधायक ने कहा 2014 में हुए नसबंदी कांड के पीड़ितों को नहीं मिला न्याय, स्वास्थ्य मंत्री ने दो अफसरों को निलंबित किया

  • बहुचर्चित इस मामले में 13 महिलाओं की हुई थी मौत, विधानसभा के ध्यानाकर्षण में उठा मामला
  • मंत्री टीएस सिंहदेव ने औषधी निरीक्षक और सहायक औषधी निरीक्षक पर की कार्रवाई 

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2020, 06:18 PM IST

रायपुर. बिलासपुर के कानन-पेंडारी में साल 2014 में हुए नसबंदी कांड का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा में गूंजा। बिलासपुर विधायक शैलेष पांडेय ने ध्यानाकर्षण में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में 20 से 30 साल की उम्र की 13 महिलाओं की मौत हुई थी जबकि 83 महिलाएं गंभीर रुप से बीमार हुई थीं लेकिन अब तक इस मामले के दोषी लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पांडेय ने कहा कि मृतक परिजनों को अब तक न्याय नहीं मिला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने औषधी निरीक्षक और सहायक औषधी निरीक्षक को निलंबित करने की घोषणा की। 

यह हुआ सदन में 
कांग्रेस विधायक रश्मि आशीष सिंह ने भी नसबंदी ऑपरेशन के दौरान अमानक दवा देने से महिलाओं की मौत होने की ओर स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने पूछा कि अमानक दवा के कारण महिलाओं की मौत हुई थी। इस मामले में तत्कालीन सरकार ने दवा खरीदने वाले डॉक्टर की बजाय आपरेशन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की थी। जबकि महावर फार्मा एवं मेसर्स कविता फार्मा तिफरा के संचालकों द्वारा दवा की आड़ में जहर की सप्लाई की गई थी।

 इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट में दवा के अमानक पाए जाने पर संबंधित दवा के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। तथा महावर फार्मा के रमेश महावर और सुमीत महावर के खिलाफ अपराध पंजीब्द कराया गया था तथा सीएमएचओ आरके भांगे को बर्खास्त किया गया है। वहीं पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायत भी दी गई है। विधायक रश्मि आशीष सिंह ने कहा इस मसले को लेकर हम लोगों ने न्याय यात्रा निकाली थी, हमारी ही सरकार में न्याय नहीं हो रहा है। विधायक पांडेय ने कहा कि इस मामले में अपराध की धारा बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने दवा खरीदी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। 

यह है नसबंदी कांड
साल 2014 की 8 नवंबर तारीख को बिलासपुर के पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर में 137 महिलाओं का ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद उनमें से 13 औरतों की मौत हो गई थी। यह मौतें का नसबंदी के अगले ही दिन शुरु हो गईं थी। तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, विपक्ष में कांग्रेस थी। तब एक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कहा गया था कि महिलाओं को दी गई सिप्रोसीन दवा में चूहा मारने वाले ज़हर जैसे तत्व थे। इसके बाद सरकार ने कथित रुप से अलग-अलग लैब में सिप्रोसिन और आईबूप्रोफेन दवा की जांच कराई और दावा किया गया कि जांच रिपोर्ट में दवाओं में ज़हर की पुष्टि हुई है। पीड़ितों को आर्थिक मदद और कुछ सरकारी मुलाजिमों पर कार्रवाइयां करने की बातें सामने आई थीं। 


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