दो श्रेणी में बांटा गया है।
बरसों से स्थायी पट्टे का सपना संजोये लोग मंगलवार को इसके लिए लगाए गए शिविरों में पहुंचे। यह कई साल का सपना सच होने जैसा था। लेकिन वहां पहुंचे लोग हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि स्थायी पट्टे के लिए उन्हें 152 प्रतिशत शुल्क चुकाना होगा। हाल में कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि जिनके पास पट्टे हैं और जो नजूल भूमि पर मकान बनाए हैं उन्हें स्थायी पट्टे दिये जायेंगे।
इन शिविरों में क्या हुआ, इसे कुछ उदाहरणों से समझें। संतोषी वार्ड के रहने वाला मंगलू रिक्शा चलाकर पेट पालता है। मंगलू के पास 15 सौ स्क्वायर फीट की पुश्तैनी जमीन है। 80 के दशक में उसे इंदिरा गांधी पट्टा भी मिला था, जिसकी अवधि तीस साल थी। इसके बाद इस पट्टे का नवीनीकरण न सरकार ने किया न मंगलू ने इस ओर ध्यान दिया। मंगलू स्थायी पट्टा लेने पहुंचा तो यहां अफसरों ने उसे बताया कि उसके पास जो पट्टा था वह अस्थाई है और इसका रिनिवल भी नहीं हुआ है। उसे सरकार जमीन पर स्थायी अधिकार तो देगी लेकिन इसके लिए उसे पहले करीब 24 लाख रुपये पटाने होंगे। भूभाटक अलग से पटाना होगा। यह सुन मंगलू निराश होकर लौट आया।
मंगलू जैसे दर्जनों लोग पट्टा लेने यहां पहुंचे लेकिन शुल्क सुनकर लौटते रहे। कुछ नाराज लोगों ने कहा कि चुनाव के बाद से सरकार की ओर से गरीबों को स्थायी पट्टा देने की बात कही जा रही थी। इस योजना के प्रचार के लिए कई शॉर्ट फिल्में भी बनाई गईं जिसमें लोग एक दूसरे को बधाई देते नजर आते हैं। इसी प्रचार के बीच निगम और पंचायत चुनाव भी बीत गये। उस समय क्यों नहीं बताया गया कि इतनी बड़ी रकम चुकानी होगी।
बोधघाट कॉलोनी में रहने वाला रामू फल की दुकान में काम करता हैं। रामू के पास बोधघाट चौक में सड़क से लगी हुई 4500 स्क्वायर फीट जमीन है। जब वह सुबह-सुबह पट्टा बनवाने गया तो राजस्व अमले ने उसे हिसाब किताब कर बताया कि उसे करीब 68 लाख 52 हजार 453 रुपये तो शुल्क के तौर पर पटाने होंगे इसके बाद इस पर भूभाटक अलग से पटाना होगा।
लोगों ने सोचा-20 से 25% चार्ज लगेगा
जब सरकार ने लोगों को जमीन का मालिकाना हक देने की बात कही थी तब इसके लिए कोई शुल्क जैसी बात नहीं बताई गई थी। इसके बाद मालिकाना हक वाले मामले का प्रचार किया फिर योजना बनी। इस प्रचार-प्रसार के दौरान कहीं भी लोगों को 152 प्रतिशत शुल्क की बात नहीं बताई गई थी। उस दौरान लोगों ने उम्मीद रखी थी कि प्रचलित दर के 20 से 25 प्रतिशत की राशि देनी होगी। इसके लिए गरीब से लेकर मध्यम वर्गीय परिवार के सदस्य मानसिक तौर पर भी तैयार थे।
जानें…पट्टे के लिए नियम
समझें…152% शुल्क कैसे चुकाना हाेगा
स्थायी पट्टे के लिए 152% राशि मांगी, रकम सुनकर शिविर में सिर पकड़कर बैठ गए लोग
गले पड़ा नियमों का ऐसा पट्टा किस्थायी पट्टे की सोच न सकेंगे लोग
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अमीरों को फायदा गरीब वहीं रह जाएंगे : भाजपा नेता संजय पांडे ने कहा कि सरकार ने जमीनें बेचकर अपना खजाना भरने की नई स्कीम निकाली है। इस योजना से सरकार और अमीरों को तो फायदा है लेकिन आम मध्यमवर्गीय परिवार और गरीब परिवार इस योजना का फायदा ही नहीं उठा पायेंगे। यह योजना गरीबों के लिए नहीं है।
विधायक बोले- सीएम साहब से बात करूंगा : इधर मामले में जब शहर विधायक रेखचंद जैन से बात की गई तो उनका कहना था कि आज ही यह मामला संज्ञान में आया है। इस मामले में लोगों काे क्या राहत दी जा सकती है उस पर सीएम साहब से भी चर्चा की जायेगी। उन्होंने कहा कि वे रायपुर में ही हैं और इस बात को वे सीएम तक पहुंचायेंगे।
जिन लोगों ने अस्थाई पट्टे या नजूल की जमीन पर घर बनाया है
उन्हें 152 प्रतिशत के हिसाब से शुल्क चुकाना होगा। उदाहरण :
यदि जमाल मिल से कुम्हारपारा के बीच किसी व्यक्ति के पास मुख्य सड़क से 20 मीटर दूर तक कोई जमीन है तो उसे गाइडलाइन रेट की 152 प्रतिशत राशि शुल्क के तौर पर पटानी होगी। मान लिया जाए कि इस राेड पर किसी की 1500 स्क्वायर फीट जमीन है, यह स्क्वायर मीटर में 139.4 होती है। अभी जमीन की सरकारी कीमत 10780 रुपये तय की गई है। ऐसे में यदि अब जिस व्यक्ति के पास स्थायी पट्टा नहीं है या उसने नजूल की जमीन पर मकान बनाया है तो पहले उसे 139.4 x 10780 =15 लाख 2 हजार 732, ये कीमत सरकार को देनी होगी। इसके बाद इस कीमत पर 52 प्रतिशत और अलग से देना होगा। यह 52 प्रतिशत की रकम 7 लाख 81 हजार 421 होती है ऐसे में 1502732 + 781421= 22 लाख 84 हजार 153 रुपये पटाने होंगे। इसके अलावा इस पूरी रकम का अलग से .03 प्रतिशत भूभाटक भी पटाना होगा।
दो भागों में बांटी गई जमीनों के लिए शुल्क भी अलग-अलग है। जिनके पास स्थायी पट्टा है वह गाइडलाइन रेट का 2 प्रतिशत शुल्क पटाकर रजिस्ट्री करवा सकते हैं लेकिन जो दूसरे भाग वाली जमीन में हैं उन्हें प्रचलित दर का 152 प्रतिशत पटाना होगा। शहर मेंं ज्यादातर लोग अस्थाई पट्टे और नजूल की जमीन पर कब्जा कर घर बनाने वालों में से हैं।
पहली वह जिसमें पहले कभी स्थायी पट्टा दिया गया और उसका नवीनीकरण नहीं करवाया गया या उसकी रजिस्ट्री नहीं हुई है।
दूसरे भाग में अस्थायी पट्टे, सरकारी जमीन पर कब्जे या दूसरे शब्दों में कहा जाये नजूल जमीन पर घर बनाने वाले शामिल हैं।
जमीन का मालिकाना हक लेने पहुंची महिला ने जब शुल्क की रकम सुनी तो सिर पकड़कर बैठ गई।
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