Chhattisgarh News In Hindi : Tarribharada News – chhattisgarh news it is only by the grace of god that one can hear the bhagavata story niranjan | भगवान की कृपा से ही भागवत कथा सुनने को मिलता है: निरंजन


ग्राम कन्हारपुरी में भागवत के अंतिम दिन निरंजन महराज ने कहा कि जब मनुष्य को कई जन्मों का पुण्य एक साथ मिलता है तो भागवत कथा कराने या सुनने का मौका प्राप्त होता है।

भगवान की कृपा और गुरु के प्रसाद से भागवत कथा के श्रवण व भागवत पुरुषों के चरित सुनने को मिलते हैं। भागवत माहात्म्य बताते हुए कहा कि ब्रह्मा जी ने अपने मानसपुत्र से चतुश्लोकी भागवत कही थी। जिसे नारद-सनकादि ऋषियाें की वार्ता में विस्तार मिला। उन्होंने कहा कि निगम रुपी कल्पतरु का यह पका हुआ फल है। जिसके रस को शुकदेव ने राजा परीक्षित को पान कराया।

उन्हाेंने आत्मदेव की कथा सुनाई। जिसमें गोकर्ण ने प्रेत योनि को प्राप्त हुए अपने भाई धुंधुकारी को सुनाकर उसका उद्धार किया। जस समय राजा परीक्षित को ऋषि के श्राप वश तक्षक सर्प ने डसना था तो राजा परीक्षित जी के उद्धार के लिए श्रीमद् भागवत की सात दिन की कथा करनी थी। पृथ्वी के सर्व ऋषियों तथा पंडितों से श्रीमद् भागवत की कथा परीक्षित को सुनाने का आग्रह किया गया। उनको यह भी पता था कि सातवें दिन परिणाम आएगा। पृथ्वी के सर्व पंडितों ने श्रीमद् भागवत की कथा सुनाने से मना कर दिया तथा कह दिया कि हम अधिकारी नहीं हैं। हम किसी के मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करके पाप के भागी नहीं बनेंगे। जिस वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत को लिखा था, उसने भी कथा सुनाने से इंकार कर दिया। सब ऋषियों ने बताया कि स्वर्ग से ऋषि सुखदेव जी को इस कार्य के लिए बुलाया जाए। वे कथा सुनाने के अधिकारी हैं। राजा परीक्षित के लिए स्वर्ग से सुखदेव ऋषि को बुलाया गया। कुछ समय नरक भोगकर युद्धिष्ठिर स्वर्ग में पुण्य फल भोग रहा है। उसने वंश के मोहवश होकर अर्जुन के पौत्रा परीक्षित के उद्धार के लिए अपने कुछ पुण्यों को सुखदेव (शुकदेव) ऋषि को दान किया। उस पुण्यों की कीमत से श्री शुकदेव ऋषि जी विमान में बैठकर पृथ्वी पर परीक्षित राजा को श्रीमद् भागवत की कथा सुनाने आए। सात दिन कथा सुनाकर परीक्षित का राज व परिवार से मोह समाप्त किया।

तार्रीभरदा. प्रवचन करते निरंजन महराज।


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