श्रीराधा कृष्ण मंदिर समिति द्वारा बाबा दरबार धनाेरा में आयाेजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बाल विदुषी अंगेश्वरी पांडे ने कहा कि मनुष्य के मन में पाप या बुरे विचार आए तो मन को समझाना चाहिए, क्योंकि आप मन के गुरु हो और मन आपका शिष्य। आपके मन को कोई दूसरा नहीं समझा सकता। देवी पांडे ने कहा कि नर जब नारायण से विमुख होता है तभी पाप करता है। ऐसे समय में भगवद कीर्तन से जीव का कल्याण होता है।
सिद्धांत को समझाने के लिए भाव पूर्ण शैली में प्रहलाद चरित्र का वर्णन किया। प्रहलाद ने बाल्यावस्था से ही राम नाम में बड़ी निष्ठा की, एक दिन भगवान ने दैत्य को मारकर उसे भक्तों से सिरमौर बनाया। साधारण प्राणियों के लिए भगवान का नाम आधार है| संसार में कई काम एेसे हैं, जिन्हें भगवान नहीं कर सकते लेकिन वही काम भगवान के नाम से हो जाते हैं|
सीख: जहां अपमान हो, वहां कभी न जाएं
आप अपने मन के गुरु हंै, उसकी चंचलता पर नियंत्रण कोई दूसरा नहीं रख सकता
कम्युनिटी रिपोर्टर | जामगांव आर
राधा कृष्ण मंदिर परसाही में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन प्रवचनकर्ता पं. कुलेश्वर प्रसाद तिवारी ने उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया, जिससे बड़ा संकट टल गया। परिवार को एकजुट और सुरक्षित रखने के लिए के लिए मुखिया में धैर्य व संयम का गुण जरूर होना चाहिए।
पं. तिवारी ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि, जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। कथा के दौरान सती चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए पं. तिवारी ने कहा कि भगवान शिव की बात को न मानने पर सती को पिता के घर पर ही अपमानित होना पड़ा।
यदि विश्वास अटल है तो प्रभु काे आना ही पड़ता है
प्रवचनकर्ता ने प्रह्लाद चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट हुए। क्योंकि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। कथा सुनने तेजराम कृपाण, बचन सिंह ठाकुर, अश्वनी यदु, गजेन्द्र यदु पहुंचे।
भगवान की भक्ति के लिए उम्र की कोई बाधा नहीं
भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा सुनाते हुए पं. तिवारी ने कहा कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए, क्योंकि बालपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है, उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया गया है। इसकी कथा बताई।
बाबा दरबार धनोरा में कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे।
ग्राम परसाही में भागवत कथा के आखिर में आरती करते श्रद्धालु।
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