China electromagnetic kill zone in the South China Sea is a matter of serious concern | दक्षिण चीन सागर में चीन की खतरनाक तैयारी, सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल जोन’ की पोल

South China Sea: दक्षिण चीन सागर में चीन की तरफ से एक नया और खतरनाक कदम उठाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन वहां एक तरह का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किल जोन बनाने जा रहा है. जिसका सीधा मतलब है कि चीन ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को तैनात कर रहा है जो दुश्मन देशों के रडार और संचार के अलावा निगरानी सिस्टम को जाम कर सकता है. 

शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ये कदम चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और आक्रामक सोच को दिखाता है. चीन का मानना है कि अगर वो सैन्य ताकत के दम पर दबदबा बनाएगा, तो उसको राजनीतिक नियंत्रण भी हासिल हो सकता है. जिसके कारण पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है. 

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षेत्र
म्यांमार के मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने दक्षिण चीन सागर को धीरे-धीरे एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षेत्र में बदलना शुरू कर दिया है. वहां पर पहले चीन ने कृत्रिम द्वीप बनाए और अब उन द्वीपों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के ठिकानों बनाने शुरू कर दिए है,  लेकिन इसका मकसद सिर्फ निगरानी करना नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य ताकत को कमजोर करना है. 

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इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सैटेलाइट तस्वीरों से साफ होता है कि चीन ने फिएरी क्रॉस, मिसचीफ और सुबी रीफ जैसे इलाकों में अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को मजबूत किया है. इसके लिए उसने एंटेना, जैमिंग वाहन, रडार ढांचे और पक्के सैन्य ठिकाने बनाए हैं. चीन इन सिस्टम्स का इस्तेमाल कर दुश्मन देशों के संचार को रोक सकता है और रडार को भी बेकार कर सकता है. इतना ही नहीं चीन विदेशी सैन्य जहाजों व विमानों की लोकेशन का भी पता लगा सकता है, जिसके चलते विरोधी सेनाएं लगभग अंधी हो सकती हैं.

मजबूत सुरक्षा घेरा
रिपोर्ट के अनुसार चीन ने  2023 से 2025 के बीच इस तकनीक में भारी निवेश किया है, जिसका  सीधा असर अमेरिका की आधुनिक युद्ध प्रणाली और उसके एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स पर पड़ सकता है. वहीं रिपोर्ट में इस बात को भी साफ तौर पर बताया गया है कि ये सिर्फ हथियारों की बात नहीं है, बल्कि चीन की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. चीन मानता है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र पर नियंत्रण उतना ही जरूरी है, जितना समुद्र पर नियंत्रण.  इसी सोच के तहत उन कृत्रिम द्वीपों, मोबाइल जैमर्स और जहाजों को जोड़कर एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया जा सकता है, जो अमेरिकी निगरानी और हमले की ताकत को कमजोर कर सकता है.

इनपुट–आईएएनएस


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