नई दिल्ली: ऐसे वक्त में जब चीन (china) ने अपने आर्थिक विस्तार कार्यक्रमों की शुरुआत कर दी है, ज़ी न्यूज़ के अंतरराष्ट्रीय चैनल WION ने अपने ग्लोबल समिट में ‘डिकोडिंग चाइना’ विषय के जरिए चीन पर बढ़ते अथाह कर्ज और आर्थिक निष्क्रियता की ढंग से पड़ताल की.
मेन्सफील्ड सेंटर के डेक्सटर रॉबर्ट्स ने WION ग्लोबल समिट में बोलते हुए कहा, ‘चीन के सुधार कार्यक्रम 5-6 साल से अटके हुए हैं और ये मध्यम वर्ग को तरक्की दिलाने में सहायक नहीं होंगे’.
डेक्सटर रॉबर्ट्स ने आगे कहा कि चीन अब ग्लोबल ग्रोथ ड्राइवर की अपनी जगह बरकरार नहीं रख पाएगा.
वहीं ‘सुपरपॉवर इंटरप्टेड’ के लेखक माइकल शुमैन ने जोर देकर कहा कि चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘संसाधनों के आवंटन’ की है, जबकि वो अपना इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार मजबूत कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘चीन मे आप पाते हैं कि चीन का बहुत सा पैसा तमाम अनुत्पादक क्षेत्रों और कंपनियों में लगाया जाता है. निजी कंपनियों से पैसा ले लिया जाता है जबकि ये कंपनियां सरकारी उपक्रमों के मुकाबले कहीं ज्यादा उत्पादक होती हैं.’
शुमैन इस बात को भरोसे के साथ कहते हैं कि चीन उधार के दुष्चक्र से बाहर निकल पाने में असमर्थ है, जो इसकी ‘डेड हैवी इकोनोमी’ को ताकत देता है.
डेक्सटर रॉबर्ट्स जोर देकर ये बात कहते हैं कि चीनी नेताओं पर बढ़ते दवाब के साथ अप्रवासी जनसंख्या के साथ चीन में ‘दोयम दर्जे के नागरिक’ की तरह व्यवहार किया जा रहा है. डेक्सटर रॉबर्ट्स को लगता है कि ‘शहरी चीनी इस अप्रत्यक्ष सौदे में फायदा लेते रहे हैं.’
चाइनाज ग्रेज वॉल ऑफ डेट (great wall of debt) के लेखक डिनी मैकमोहन ने कहा, ‘अगर कर्ज अपनी सामान्य गति से बढ़ता है तो यह आर्थिक विकास को बढ़ाता है. लेकिन चीन में हम क्या पाते हैं कि वहां ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ढूंढना काफी मुश्किल होगा कि जो कर्ज लेने जा रहे हों और इकॉनोमिक रिटर्न पैदा करें’.
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