- सीएम गहलोत का केंद्र पर हमला
- पीसीआर टेस्ट के लिए किट की मांग
रैपिड टेस्ट किट को लेकर राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार के बीच राजनीति शुरू हो गई है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि हमने पहले ही सचेत किया था, अगर सरकार जाग जाती तो आईसीएमआर को इस जांच को सस्पेंड नहीं करना पड़ता. उन्होंने कहा कि सरकार अगर स्टडी करती और खरीद के सिस्टम को सेंट्रलाइज्ड किया जाता है तो यह नौबत नहीं आती.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि हम ज्यादा से ज्यादा जांच कर रहे हैं, लेकिन रैपिड टेस्ट किट के फेल होने के बाद हमने भारत सरकार से कहा कि हमें अब पीसीआर टेस्ट के लिए किट उपलब्ध कराई जाएं.
एक तरफा फैसले से नुकसान
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भारत सरकार एक तरफा फैसले लेती है, जिसकी वजह से हमें नुकसान होता है और अभी नुकसान हो रहा है. अगर भारत सरकार को 3 मई के बाद लॉक डाउन बढ़ाना है या खत्म करना है तो उसके बारे में अभी से हम लोगों से विचार-विमर्श शुरू करें.
सीएम ने कहा कि केंद्रीय टीम से हमारी बातचीत हुई और उनसे हमने यही कहा है कि केंद्र सरकार के पास एफसीआई में बहुत अनाज पड़ा है. आप गरीबों को गेहूं दीजिए और दूसरा मजदूरों के जाने के लिए रास्ते खोलिए.
गृह मंत्री का नहीं आया जवाब
अशोक गहलोत ने कहा कि हमने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की थी कि देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हुए मजदूरों को उनके घर भेजा जाए. उन्होंने कहा था कि मंगलवार को जवाब देंगे, लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है.
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उन्होंने कहा कि कोटा के बच्चों को भेजने के लिए हमने देश के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की है. बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा सब तैयार हैं.
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सीएम गहलोत के मुताबिक, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार का कहना है कि हमारे बहुत सारे मजदूर फंसे हुए हैं. हमारी कुछ मजबूरियां हैं, लेकिन ये मासूम बच्चे हैं. इनके लिए भारत सरकार ने पहले ही इजाजत दी थी, अब सोचना चाहिए.

