नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
जबसे कोरोना वायरस ने इस दुनिया को अपनी गिरफ्त में लिया है, तब से अब तक हम सभी का जीवन पूरी तरह बदल गया है। खान-पान में सुधार से लेकर हेल्दी लाइफस्टाइल तक, हम अब तक जिन चीजों की अनदेखी करते थे, हमने सभी को वैल्यू देना शुरू कर दिया है। खासतौर पर हमारे युवाओं ने तो उन सब बातों को कोरोना के चलते मान लिया, जिन्हें मनवाने के लिए उनके माता-पिता कई साल से कोशिश कर रहे थे। स्मोकिंग ऐसा ही एक काम है…कोरोना ने मनवा दी पैरंट्स की बात

भले ही माता-पिता खुद स्मोकिंग और ड्रिंकिंग करते हों, ये जानते हुए भी कि यह सेहत के लिए घातक है। लेकिन जब उनके बच्चे इस दिशा में बढ़ने लगते हैं तो उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। वे अपने बच्चे की सेहत और उसके भविष्य को लेकर चिंता करने लगते हैं।
-पिछले कई साल से लाखों की संख्या में युवाओं के पैरंट्स उनसे स्मोकिंग छोड़ने के लिए कह रहे होंगे, लेकिन वे लगातार अपने पैरंट्स को अनसुना कर रहे थे। उन्हें झूठ बोल रहे थे या झूठे प्रॉमिस कर रहे थे। लेकिन कोरोना ने ऐसे 1 दो हजार या लाख नहीं बल्कि लाखों युवाओं को स्मोकिंग की आदत छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स ने पहले ही चेता दिया था

-हेल्थ एक्सपर्ट्स समय-समय पर यह बात बताते रहे हैं कि कोरोना उन लोगों को जल्दी अपना शिकार बनाता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। साथ ही जिनके फेफड़े कमजोर होते हैं, उनके लिए कोरोना जानलेवा साबित हो सकता है।
– स्मोकिंग फेफड़ों को कमजोर बनाने का ही काम करती है। इससे बचने के लिए पिछले 4 महीने में करीब 10 लाख लोगों ने सिगरेट,बीड़ी और शिगार का सेवन करना छोड़ दिया है।
कोरोना महामारी को श्रेय दिया

-यह बात समाज कल्याण की दिशा में किए गए एक सर्वे में सामने आई है। जहां 41 प्रतिशत लोगों ने इस बात को माना है कि उन्होंने कोरोना के कारण ही स्मोकिंग करना बंद कर दिया है।
-ध्यान दिला दें कि हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कोरोना महामारी की शुरुआती समय में ही इस बात की जानकारी दे दी थी कि एक स्मोकर यानी धूम्रपान करनेवाले व्यक्ति को ऐसा ना करनेवाले व्यक्ति की तुलना में कोरोना संक्रमण होने का खतरा 14 प्रतिशत अधिक होता है।
स्मोकिंग करनेवालों को यहां भी खतरा

-इसके साथ ही यूके निवासी 2.4 मिलियन लोगों पर किए गए एक शोध में यह बात साफ हो गई कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं, कोरोना से संक्रमित होने पर उनके हॉस्पिटल में भर्ती होने के चांस उन लोगों से दो गुना होते हैं, जो स्मोकिंग नहीं करते हैं।
-इसी के साथ यह बात भी साफ हो गई कि यूएसए में कोरोना के संक्रमण से ग्रसित जो लोग हॉस्पिटल्स में भर्ती हुए थे, उनमें से जितने लोगों की मौत हुई, उनमें स्मोकर्स का आंकड़ा नॉनस्मोकर्स से 1.8 गुना अधिक रहा।
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