मुंबई: कोरोना महामारी के चलते पैदल गांव लौट रहे मजदूर, इसमें गर्भवती महिला-बच्‍चे शामिल, कई के पास तो खाना भी नहीं

मुंबई: कोरोना महामारी के चलते पैदल गांव लौट रहे मजदूर, इसमें गर्भवती महिला-बच्‍चे शामिल, कई के पास तो खाना भी नहीं..

पांच माह की गर्भवती अनुदेवी भी पैदल गांव लौटने को मजबूर हैं

मुंंबई:

Coronavirus Lockdown: देश में कोरोना वायरस के केस बढ़ते हुए 52 हजार के पार पहुंच चुके हैं. कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्‍यादा प्रभावित महाराष्‍ट्र राज्‍य है जहां संक्रमितों की संख्‍या 16 हजार पार कर चुकी है. मायानगरी मुंबई में केस बढ़ते हुए 10 हजार के पार पहुंच चुके हैं. कोरोना वायरस की महामारी के कारण सबसे ज्‍यादा प्रभावित वे मजदूर हो रहे हैं जिनके पास रोजी-रोटी का कोई साधन नहीं बचा है. लॉकडाउन के कारण इन्‍हें काम नहीं मिल रहा है और ये आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. पैसों की कमी से जूझते इनमें से कई लोग पैदल ही घर लौटने को मजबूर हैं. मुंबई में कोराना केसों की बढ़ती संख्‍या के कारण भी कई लोग पैदल ही अपने गांव लौट रहे हैं.वापस लौटने वाले इन लोगों में गर्भवती महिला, छोटे-छोट बच्‍चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं. इनमें से ज्‍यादातर लोगों के पास तो खाने के लिए ज्‍यादा सामान तक नहीं है. एक शख्‍स रामदास को तो गाड़ी से टकराने के कारण चोट भी लग चुकी है.

अपने गांव वापस लौटने को विवश अनुदेवी 5 महीने की गर्भवती हैं. वे लगातार चलती जा रही है. गर्भावस्‍था में जब खाने के लिए पौष्टिक भोजन की जरूरत होती है, अनु के पास केवल बिस्कुट ही बचे हुए हैं वह भी छोटे बच्चों के लिए. ऐसे में दूसरे लोगों से मिली भोजन सामग्री से गुजारा हो रहा है. सुबह किसी ने पोहा दिया था.अब खाना भी नहीं बचा हुआ है. ग्रुप में करीब 15 लोग हैं जिनमें 1 और ढाई साल के बच्चे भी शामिल है.

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एक अन्‍य मजदूर रामदास लगातार चलते रहे हैं. वह बुधवार कल रात एक गाड़ी से टकरा गए और तब से सर से खून बह रहा है. 12 घंटों से ज़्यादा का समय हो चुका है, कोई चोट इलाज भी नहीं हो पाया है. वे कल्याण से निकले हैं, नागपुर के पास जाना है. इसी तरह, बेबी मुम्बई के राम मंदिर एरिया से अपने 17 दिन के बच्चे के साथ निकली हैं.. मुम्बई में बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए उन्‍होंने घर लौटना ही उचित समझा. उन्‍हें महाराष्ट्र के वाशिम ज़िले जाना है. लगातार चलने के कारण माँ को भी चक्कर आ रहे हैं. ,ऐसे में मदद के लिए पुलिस के पास गए थे, उन्‍होंने कहा था कि अगर परमिशन मिली  तो गाँव से गाड़ी मंगवाकर जाएंगे लेकिन इजाजत नहीं मिलने के कारण पैदल ही घर जा जाने को विवश हैं.

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