Coronavirus Pandemic: Indias aviation sector in financial crisis – Coronavirus Pandemic: सरकार की आर्थिक मदद के बिना उड़ान नहीं भर पाएगा देश का एविएशन सेक्‍टर

Coronavirus Pandemic: सरकार की आर्थिक मदद के बिना 'उड़ान' नहीं भर पाएगा देश का एविएशन सेक्‍टर

भारत में एविएशन सेक्‍टर आर्थिक मंदी और कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है

नई दिल्ली:

Covid-19 Pandemic: कोरोना वायरस की महामारी और सरकार की ओर से किसी भी तरह की वित्‍तीय मदद के संकेत नहीं मिलने के बीच देश का विमानन सेक्‍टर (Aviation Sector) दिवालियेपन के करीब पहुंच चुका है. ऐसे समय जब देश में लॉकडाउन 3 मई तक आगे बढ़ाया जा चुका है, भारतीय विमान कंपनियां उड़ान भरने के लिए बेताब होने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं. हालत यह है कि कोई भारतीय कंपनी 14 अप्रैल की पूर्व निर्धारित डेट के बाद यात्रियों द्वारा बुक कराए गए टिकटों को रिफंड लौटा पाने की स्थिति में भी नहीं है. गौरतलब है कि देश में 21 दिन का लॉकडाउन पहले 14 अप्रैल को खत्‍म होना था लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के हालात को देखते हुए मंगलवार को पीएम ने इसे 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया था.

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 इसके बजाय, स्पाइसजेट, विस्तारा, इंडिगो और गो-एयर ने यात्रियों से कहा है कि 3 मई तक की यात्रा के लिए उनकी बुकिंग रद्द कर दी गई है और उनकी पूरी राशि एक “क्रेडिट-शेल” में सुरक्षित होगी, जिसका उपयोग यात्रा के बाद वर्ष में बुक करने के लिए या अगले साल की शुरुआत में किया जा सकता है.हालांकि इसके बावजूद अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि इनमें से ये एयरलाइन कंपनियां अगले कुछ महीनों में सरकार के भारीभरकम ‘बेलआउट पैकेज’ के बिना अस्‍त‍ित्‍व में रह पाएंगी या नहीं. देश में नागर विमानन सेक्‍टर पर गहराई से नजर रखने वाले सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन (CAPA) के अनुसार, ज्‍यादातर इंडियन एयरलाइंस का बिजनेस मॉडल ही इस तरह का नहीं है कि ईंधन की ऊंची कीमतों और आर्थिक मंदी जैसे झटकों को झेल सके. तस्‍वीर एक तरह से साफ है कि तीन माह के शटडाउन की स्थिति में दो बड़ी एयरलाइन कंपनियों इंडिगो और स्‍पाइस जैट का वर्ष 2020 के चौथे क्‍वार्टर और वर्ष 2021 के पहले क्‍वार्टर का समग्र घाटा 1.25 से 1.50 अरब यूएस डॉलर तक पहुंच जाएगा. CAPA की रिपोर्ट ‘प्रोजेक्‍टिंग द पोटेंशियल फाइनेंशियल इम्‍पेक्‍ट ऑफ कोविड-19 ऑन इंडियन एविएशन’ के अनुसार, छोटे कैरियर की हालत तो इतनी खराब हो जाएगी कि उन्‍हें ‘मैदान ही छोड़ना’ पड़ सकता है. एविएशन सेक्‍टर में आई इस मंदी के कारण कई देशों में लाखों की संख्‍या में लोगों की नौकरी जाने का खतरा है, हालांकि भारत में फिलहाल इस तरह की घोषणा नहीं की गई है.

अमेरिका की बात करें तो यहां आर्थिक संकट के कारण परेशान एयरलाइंस 71 अरब यूएस डॉलर के सहायता पैकेज के भरोसे हैं.यूके यानी ब्रिटेन में एयरलाइंस जॉब प्रोटेक्शन के उपायों के तहत तीन महीने तक सरकार को एक निश्चित सीमा तक 80 प्रतिशत वेतन देने का अनुरोध कर सकती हैं. इसी तरह यूरोपीय संघ में विभिन्न एयरलाइनों ने पहले ही पैकेज के लिए अपनी सरकारों के साथ बातचीत शुरू कर दी है. फिनएयर ने $650 मिलियन डॉलर की लोन गारंटी हासिल की है जबकि नॉर्वे की एयरलाइंस को 540 मिलियन डॉलर और स्‍वीडन की एयरलाइंस को 540 मिलियन डॉलर की राशि, सहायता पैकेज के तौर पर देने का वादा किया गया है. सिंगापुर और यूएई जैसे देश जिनकी इकोनॉमी काफी कुछ सिविल एविएशन सेक्टर पर ही निर्भर है, ने अपनी प्रमुख एयरलाइंस को बचाने के लिए आर्थिक मदद दी है, यूएई सरकार भी इक्विटी इन्फ्यूजन के जरिये अपनी एयरलाइंस के समर्थन में खड़ी है जबकि जबकि सिंगापुर ने विमानन क्षेत्र के लिए $ 500 मिलियन के पैकेज, $ 2.8 अरब के ऋण और इक्विटी और परिवर्तनीय बॉन्ड में $ 10 बिलियन के अधिकारों की घोषणा की है  

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