CRPF जवानों ने घबराहट में 8 आदिवासियों को जान से मार दिया, पढ़ें- न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट

रायपुर. 17 मई साल 2013 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के एडसमेटा मुठभेड़ की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सोमवार को सदन में पेश की गयी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच रिपोर्ट पेश की. बीजापुर जिले के बासागुड़ा थाने के अंतर्गत आने वाले गांव एडसमेटा में सुरक्षाबलों की फायरिंग में आठ लोगों की मौत हुई थी. मारे गए लोगों में तीन नाबालिग भी शामिल थे. सदन में पेश की गई न्यायिक जांच रिपोर्ट में यह माना गया है कि सुरक्षाबलों की चूक की वजह से आठ लोगों की जान गयी है. न्यायमूर्ति व्हीके अग्रवाल की एक सदस्यीय जांच आयोग द्वारा एडसमेटा मुठभेड़ की न्यायिक जांच की गयी थी.

न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के तथ्य
-यह स्थापित नहीं हुआ है कि मुठभेड़ नक्सलियों के साथ हुई. एडसमेटा गांव के पास आग के इर्द-गिर्द इकट्ठे लोगों को देखकर संभवतः उन्हें गलती से नक्सली समझकर घबराहट में गोली चलाने से हुई.
-सुरक्षाबलों के संस्करण के मुताबिक सभी मृतकों के परिजनों को और घायलों को राज्य शासन द्वारा मुआवजा प्रदान की गई.
-मृत या घायल व्यक्तियों में से किसी का भी नक्सली संगठन से जुड़ा हुआ प्रमाणित नहीं हुआ है क्योंकि इस संबंध में कोई संतोषजनक साक्ष्य नहीं है.
-अगर सुरक्षाबल उचित सावधानी बरतते तो संभवतः गोलीबारी टाली जा सकती थी.
-इसकी पूरी संभावना है कि आरक्षक देव प्रकाश की क्रॉस फायरिंग में गोली लगने से हुई मौत.
-विवेचना में बड़ी लापरवाही की गई. दस्तावेज ठीक से तैयार नहीं किये गए. केस डायरी और ड्यूटी रजिस्टर जैसे दस्तावेज में प्रस्तुत नहीं किये गए.
-ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आग के पास जमे लोगों के पास खतरनाक हथियार थे.
-3 नाबालिग समेत 8 आदिवासी मारे गए थे.
-सुरक्षा बल के पास पर्याप्त खूफिया जानकारी और सुरक्षा उपकरण नहीं थे.

एडसमेटा मुठभेड़ की न्यायिक जांच रिपोर्ट में आयोग ने दिए सुझाव
-कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु बलों को आधुनिक उपकरण और संचार के साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए.
-इंटर-कम्यूनिकेशन सिस्टम को भी और अधिक प्रभावी और कार्यक्षम बनाना चाहिए.
-सभी सुरक्षाकर्मियों को बुलेट प्रूफ जैकेट’, ‘नाइट विजन उपकरण जैसे उपयुक्त और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जाने चाहिए. ताकि बल के सदस्य और अधिक सुरक्षित आश्वश्त महसूस करें तथा जल्दबाजी या घबराहट में कार्य न करें.
-निवासियों के त्यौहारों तथा गतिविधियों में सम्मिलित होने की सलाह दी जानी चाहिए ताकि सुरक्षा बल उनके रहन-सहन और रीति-रिवाजों से परिचित हो सके.
-खुफिया सूचना-तन्त्र को और भी अधिक मजबूत तथा विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए.
-बस्तर के ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में सामान्य विकास, विशेषकर सड़कों की संयोजकता में युद्ध स्तर पर सुधार किया जाना चाहिए.

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Tags: Crime News, Raipur news


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