Delhi BJP reviewing, Congress also responsible for the election defeat – दिल्ली बीजेपी कर रही समीक्षा, विधानसभा चुनाव में हार के पीछे कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया!

नई दिल्ली:

दिल्ली बीजेपी ने हार की समीक्षा के लिए मैराथन बैठक शुरू कर दी है. बीजेपी को अब ये भी महसूस हो रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में उसकी हार के पीछे कांग्रेस का अति खराब प्रदर्शन भी जिम्मेदार रहा है. बीजेपी प्रदेश कार्यालय में लगे दो दर्जन पोस्टरों में से एक पोस्टर पर लिखा है-  ”जीत से हम अहंकारी नहीं होते, पराजय से हम निराश नहीं हैं.” यही एक पोस्टर है जो पार्टी कार्यकर्ताओं में उम्मीद पैदा कर रहा है. शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और महासचिव अरुण सिंह ने 140 से ज्यादा पदाधिकारियों से बंद कमरे में हार के कारणों की जानकारी ली.

सूत्र बताते हैं कि बीजेपी की हार के पीछे मुफ्त बिजली और पानी के विषय को घोषणा पत्र में शामिल न करना, 60 से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त होना, कई सीटों पर टिकट बंटवारे के बाद हुई गुटबाजी, कुछ सांसदों की कार्यशैली और चुनाव प्रचार में जोर न लगाना, जैसे कारण बताए गए हैं. हालांकि उसके बावजूद वोट बैंक बढ़ने की बात कहकर कार्यकर्ताओं को सांत्वना दी जा रही है.

मनोज तिवारी ने कहा कि ”आज हमारी समीक्षा चल रही है. आंतरिक समीक्षा चल रही है. चुनाव जरूर हारे लेकिन हमारा जनाधार बढ़ा है.”

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अगले तीन दिन तक बीजेपी हारे प्रत्याशियों, पार्षदों और बाहर से चुनाव प्रचार करने के लिए आए नेताओं से हार के कारण पूछेगी. दिल्ली कैंट से बीजेपी प्रत्याशी मनीष सिंह भी हार का कारण बताने बीजेपी आफिस पहुंचे. वे अंतिम समय में सीट बदलने और बिजली पानी के मुद्दे को हार का बड़ा कारण बता रहे हैं. मनीष सिंह ने कहा कि ”बिजली पानी का मैटर है. पूरी दिल्ली के हारने का कारण ये रहा कि कांग्रेस की जमानत जब्त हो रही है.”

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विधानसभा चुनाव में मिली इस हार के बाद अब दिल्ली चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर भी उंगलियां उठ रही हैं. पार्टी अब महसूस कर रही है कि केजरीवाल को आंतकी कहना और गोली मारने जैसे नारे लगवाने से पढ़े लिखे वोटरों, खास तौर पर महिलाओं पर इसका उल्टा असर हुआ है.

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बीजेपी के कार्यालय में अब शांति है जो बड़े फेरबदल की आंधी की आहट है. लेकिन बीते बीस साल से लगातार विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद किसी स्थानीय नेता का खुद को भरोसेमंद साबित न कर पाने को भी बीजेपी की एक बड़ी नाकामयाबी के तौर पर गिना जा रहा है.

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