Delhi Violence: Grief of losing loved ones in riots and now waiting for dead bodies outside postmortem house

नई दिल्ली:

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में मारे गए लोगों के परिजन अब भी पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपनों के शवों का इंतजार कर रहे हैं. इन दंगों में जहां बाबू खान ने अपने दो बेटों को खोया, वहीं रिक्शा चलाने वाले रामसिगुरत को 72 घंटे बाद नितिन का शव मिला. दिल्ली के दंगाग्रस्त इलाकों में जैसे-जैसे मीडिया और प्रशासन पहुंच रहा है, वैसे-वैसे दंगे के कई दर्दनाक पहलू सामने आ रहे हैं.

तीन दिन पहले बेटे की लाश लेने आए रामसुगारित पासवान हमें खड़े मिले थे. वे शनिवार को मार्चुरी के बाहर बैठे दिखे. शाम तक दंगाईयों के हाथों मारे गए बेटे नितिन की लाश मिलने की उम्मीद है, लिहाजा टीवी पर खबर देखकर पंजाब से उनके समधी कमलतेज पासवान भी आए हैं. दंगे के बाद छह दिन से रामसुगारित पासवान न रिक्शा चला पाए हैं और न ही नितिन की मां को दिलासा दे पाए. हालात ये है कि खाना भी पड़ोसियों के घर से आ रहा है.

रामसुगारित पासवान ने बताया कि नितिन की मां रह रहकर बेहोश हो जाती है. उसे दौरा पड़ रहा है, पेट में दर्द हो रहा है. खाना नहीं खाती है. पड़ोसियों के यहां से खाना आ जाता है, वही रिश्तेदार खाते हैं.

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जीटीबी हास्पिटल की मार्चुरी के बाहर बैठे बाबू खान को दिल्ली के दंगों ने मानसिक तौर पर तोड़ दिया है. 26 तारीख को इनके दोनों बेटों को दंगाईयों ने मौत के घाट उतार दिया. दो बेटों की मौत के तीन बाद यानी शनिवार को डेडबॉडी मिली है. दो जवान बेटों की मौत के बाद अब पिता बाबू खान पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है. उन्होंने कहा कि आमिर की दो छोटी छोटी बच्चियां हैं. मेरा तो बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया.

Delhi Violence: दंगों में अपनों को खोने वाले अब उनके शव न मिलने से परेशान

शनिवार शाम तक 25 शवों का पोस्टमार्टम हो चुका है लेकिन 13 शवों का पोस्टमार्टम होना अभी बाकी है. जबकि 7 शवों की पहचान भी अब तक नहीं हुई है. दिल्ली के दंगाग्रस्त इलाकों में जैसे-जैसे मीडिया और प्रशासन पहुंच रहा है, वैसे-वैसे दंगे के कई दर्दनाक पहलू सामने आ रहे हैं. शिव विहार जैसे इलाकों में चारों तरफ तबाही का मंजर है.

VIDEO : मरने वालों के परिजन कर रहे शवों का इंतजार


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