हम कई मायनों में किस्मतवाले हैं कि हमारा स्वभाव पश्चिम के देशों की तरह नहीं है. हमारे यहां ज़्यादातर नागरिक राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझते हैं. हमारे यहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस बात को समझता है कि देश के ऊपर कितना बड़ा संकट आया है. सिर्फ कुछ मुट्ठीभर लोग ही इस बात का एहसास नहीं कर रहे हैं. बाकी दुनिया में तो हाल ये है कि वहां पर लॉकडाउन का पालन करने की बात तो दूर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
ये दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट की तस्वीरें हैं. आप सोचिए ये किस तरह के लोग हैं, जो लॉकडाउन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. लॉकडाउन इन्हीं लोगों के भले के लिए लागू किया गया है, जिससे कोरोना वायरस के खतरे से इन लोगों को बचाया जा सके. लेकिन अमेरिका के लोग ये मांग कर रहे हैं, कि उन्हें लॉकडाउन से आज़ादी दी जाए. अमेरिका के इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो stay-at-home order को नहीं मानेंगे और घर से बाहर निकलेंगे. अमेरिका के कई राज्यों में ऐसे प्रदर्शनकारी सड़कों पर आकर “Freedom over fear” और “Shutdown the shutdown” जैसे नारे लगाकर नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं. ये ना तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर रहे हैं, ना ही फेस मास्क से खुद का बचाव कर रहे हैं.
सोचिए ये उस देश का हाल है, जहां कोरोना वायरस के सबसे ज़्यादा मामले और कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा मौत हुई है. अमेरिका में संक्रमण के मामले 8 लाख हो चुके हैं, और 43 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसलिए अमेरिका के कई राज्यों में 30 अप्रैल तक लॉकडाउन है, कई राज्यों में 20 मई तक लॉकडाउन है, और कई राज्यों में तो ये कहा गया है कि जब तक वायरस का खतरा दूर नहीं होता, तब तक सख्ती बनी रहेगी.
हालत ये हो गई है कि लोगों को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए खुद स्वास्थ्य कर्मचारियों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है. अमेरिका से ऐसी तस्वीरें आई हैं, जहां पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के सामने स्वास्थ्य कर्मचारी खड़े हो गए. ये अमेरिका के कोलोराडो की तस्वीरें हैं, जहां लॉकडाउन विरोधी महिला प्रदर्शनकारी की कार का रास्ता एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने रोक लिया. ये महिला उस स्वास्थ्य कर्मचारी पर चीख रही थी कि हमें आज़ादी चाहिए और अगर स्वास्थ्य कर्मचारी काम पर जा सकते हैं तो फिर वो काम पर क्यों नहीं जा सकती? लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी ने इस महिला की गाड़ी आगे नहीं बढ़ने दी.
अमेरिका में 95 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी इस वक्त किसी ना किसी तरह के लॉकडाउन नियमों की वजह से घरों में बंद हैं. अमेरिका के 50 राज्यों में से 40 से ज़्यादा राज्यों में लोगों को घरों में ही रहने के आदेश हैं लेकिन पिछले कई दिनों से अमेरिका में लॉकडाउन के विरोध में लोग सड़कों पर निकल रहे हैं और इस तरह की रैलियां और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अमेरिका में एक बड़ा संकट ये भी है कि कोरोना वायरस की वजह से जिस तरह के आर्थिक हालात बन रहे हैं, उसमें 2 करोड़ से भी ज़्यादा लोग बेरोज़गार हो गए हैं. वर्ष 1930 की महामंदी के बाद इतने बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी अमेरिका में कभी नहीं देखी गई. इसीलिए लॉकडाउन के नियम हटाकर फिर से कामकाज शुरू करने के लिए लोग दबाव बना रहे हैं.
अमेरिका में जीवन ही अर्थव्यवस्था पर आधारित है. वहां पर अर्थव्यवस्था पहले है, जिंदगी उसके बाद में आती है. अमेरिका में अर्थव्यवस्था रुकने का मतलब है कि जीवन का रुक जाना. इसलिए लॉकडाउन हटाने या ना हटाने के मुद्दे पर अमेरिका की अंदरूनी राजनीति भी सक्रिय है. अमेरिका में 50 राज्य हैं, इन राज्यों का शासन वहां के चुने हुए गवर्नर्स के पास होता है और केंद्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति शासन देखता है इसलिए इसे United States of America कहा जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के समर्थक अपने विरोधी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के Governor वाले राज्यों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. डोनल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते इन राज्यों के गवर्नर्स के खिलाफ कहा था कि इन राज्यों में लॉकडाउन के नियम बहुत सख्त हैं. पिछले हफ्ते ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने का प्लान बताया था और 1 मई के बाद अर्थव्यवस्था फिर से शुरू करने के संकेत दिए थे, लेकिन लॉकडाउन के नियमों में रियायत देने या ना देने का फैसला राज्यों के गवर्नर्स को ही करना है.
हमने आपको अमेरिका की तस्वीरें दिखाई हैं, दूसरे कई देशों से भी लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनों की तस्वीरें आई हैं. ब्राज़ील में तो खुद वहां के राष्ट्रपति लॉकडाउन के विरोध में हैं और लॉकडाउन विरोधी रैलियों में शामिल हो रहे हैं. ऐसी ही एक रैली में वो समर्थकों के बीच बिना फेस मास्क लगाए पहुंच गए. ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेर बोलसोनारो (Jair Bolsonaro) वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था को बंद करने के पक्ष में नहीं हैं. इसके लिए वो ब्राज़ील के राज्यों के गवर्नर्स की लगातार आलोचना कर रहे हैं कि लॉकडाउन को हटाया जाए. लॉकडाउन का फैसला ब्राज़ील में संसद और सुप्रीम कोर्ट ने किया था. लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनों में संसद और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भी नारेबाज़ी हो रही है और उन्हें बंद कर देने की बात हो रही है. ब्राज़ील के राष्ट्रपति तो पहले से ही कोरोना को कोई बड़ा खतरा नहीं मान रहे हैं और इसे सामान्य फ्लू की तरह बता चुके हैं. जबकि लेटिन अमेरिका के देशों में कोरोना वायरस के सबसे ज़्यादा नए मामले ब्राज़ील में ही हैं. ब्राज़ील में कोरोना वायरस के 40 हज़ार से भी ज़्यादा मामले आ चुके हैं और ढाई हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
यही हाल रूस में दिख रहा है. यहां कई शहरों में लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी लॉकडाउन को हटाने की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि उद्योग बंद होने से नौकरियां चली गई हैं, आम लोगों को कोई मदद नहीं मिल रही है, ऐसे में वो अपना जीवन कैसे चलाएंगे. रूस में कोरोना वायरस के मामले अचानक से बढ़े हैं और इसका आंकड़ा 50 हज़ार के पार पहुंच गया है.
इसी तरह कोलंबिया में लोग लॉकडाउन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से उनका जीवन संकट में है, उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है. कोलंबिया में 11 मई तक लॉकडाउन है. वहां पर कोरोना वायरस के करीब चार हज़ार मामले हैं और करीब 200 लोगों की मौत हुई है.
कोरोना वायरस का संकट पूरी दुनिया में आया है, लेकिन इस संकट के बीच जिस तरह की राजनीति देखने को मिली है, उसके सबसे बड़े उदाहरण अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देश हैं. हमने आपको इन देशों की तस्वीरें भी दिखाई हैं. इस राजनीति की वजह से ही इन देशों में कोरोना वायरस से बड़ा संकट है. खासतौर पर अमेरिका तो कोरोना वायरस का केंद्र बन चुका है. इस वायरस से दुनिया की 25 प्रतिशत मौतें अकेले अमेरिका में हुई हैं. फिर भी वहां पर डोनल्ड ट्रंप के समर्थक और डोनल्ड ट्रंप के विरोधी दोनों राजनीति करने में जुटे हैं जबकि अमेरिका के ही बगल में कनाडा है, वहां पर अमेरिका जैसी ना तो राजनीति हुई, ना ही अमेरिका जैसी तबाही हुई. कनाडा में कोरोना के करीब 37 हज़ार मामले हैं और करीब 17 सौ लोगों की मौत हुई है.
चीन, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देशों ने भी वायरस संक्रमण को कंट्रोल किया है, क्योंकि वहां पर राजनीति नहीं हुई. भारत में भी अलग अलग राज्य अपने हिसाब से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उस तरह की राजनीति नहीं देखी गई, जिस तरह की राजनीति हम देखते आए हैं. हालांकि आज केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार कोरोना वायरस पर स्थिति की समीक्षा करने में सहयोग नहीं कर रही है. केंद्र सरकार की एक टीम को पश्चिम बंगाल भेजा गया था, लेकिन आरोप ये लगे कि राज्य सरकार इस टीम को प्रभावित इलाकों में जाने में रुकावट डाल रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख चुकी हैं कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल के कुछ विशेष जिलों में अपनी टीम को भेजने का जो फैसला किया है, वो किस आधार पर किया गया, ये स्पष्ट नहीं है.
अब आपको ये समझना चाहिए कि लॉकडाउन से जुड़ी आजादी कैसे आपके जीवन को खतरे में डाल सकती है? जो देश अपने यहां लॉकडाउन हटा रहे हैं या लॉकडाउन हटाने का प्लान बना रहे हैं, उन्हें इस जल्दबाज़ी से बचना होगा, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इसे लेकर एक बहुत बड़ी चेतावनी दी है.
WHO ने कहा है कि कोरोना वायरस की वजह से दुनिया का सबसे बुरा वक्त आना अभी बाकी है. WHO के मुताबिक अभी प्रतिबंधों में रियायत देने का वक्त नहीं है, क्योंकि इससे वायरस के फिर से बड़ा हमला करने की संभावना बढ़ जाएगी. WHO के प्रमुख पहले ही ये चेतावनी दे चुके है कि अब कोरोना वायरस अफ्रीका के देशों में भी तेज़ी से फैल सकता है. WHO ने कहा है कि सरकारों को अभी वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सजग रहना होगा. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेसिंग के नियमों को धीरे धीरे ही हटाना होगा, जिससे लोग भी स्वस्थ रहें और अर्थव्यवस्था भी चल सके. WHO ने ये भी है कि हमें भविष्य के लिए नए तौर तरीके वाला जीवन जीने की तैयारी कर लेनी चाहिए.


