नई दिल्ली: हमारे देश का मीडिया राजनीति और रणनीति की खबरों से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं. इसलिए अखबारों के पहले पन्ने पर या तो राजनीति की खबरें होती हैं या रणनीति की खबरें होती हैं, जबकि प्रेणादायक और भावुक करने वाली खबरें बहुत कम होती हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे हैं जो भारत के 137 करोड़ लोगों को एक मां की असली शक्ति का एहसास कराएगी. ये खबर देशभर की महिलाओं को प्रेरणा देने वाली खबर है.
एक मां की दिलेरी की कहानी
दिल्ली के शकरपुर इलाके की एक कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरे से एक ऐसा वीडियो सामने आया जो एक मां की दिलेरी की कहानी कहता है. इस वीडियो में दो लोग एक मोटर साइकिल पर आकर, एक 4 साल की बच्ची को उसके घर से किडनैप करने की कोशिश करते हैं. लेकिन पीछे-पीछे इस बच्ची की मां घर से बाहर आ जाती है और वो इस मोटरसाइकिल को जोर का धक्का देती है जिससे दोनों किडनैपर नीचे गिर जाते हैं.
इसके बाद सबसे पहले ये महिला अपनी बच्ची को सुरक्षित करती है और फिर किडनैपर्स की मोटरसाइकिल को बहुत देर तक पकड़ कर रखती है. फिर भी किडनैपर बचकर भागने में कामयाब हो जाते हैं. लेकिन ये कहानी यहां खत्म नहीं होती इसके बाद इस कॉलोनी के कुछ लोग इन किडनैपर्स के पीछे दौड़ते हैं और इन्हें नीचे गिराने की कोशिश करते हैं.
इसी दौरान एक व्यक्ति एक स्कूटी को सड़क के बीच में खड़ा करके इन किडनैपर्स का रास्ता रोक देता है. किडनैपर नीचे गिर जाते हैं और फिर ये लोग इन किडनैपर्स को पकड़ने की कोशिश करते हैं. हालांकि सारी कोशिशों के बावजूद ये किडनैपर वहां से भाग जाते हैं. पुलिस ने इस साजिश में शामिल बच्ची के चाचा और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है.
शकरपुर के इस वीडियो से दो बातें साफ हो जाती हैं, पहली ये कि एक मां अपने बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान को भी खतरे में डाल सकती है और दूसरी ये कि हमारे समाज में अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपना कर्तव्य निभाना जानते हैं. जिन अपराधियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पुलिस की है. उन्हें समाज के वो लोग भी पकड़ सकते हैं जो घटना के हो जाने के बाद पुलिस के आने का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपनी सूझ-बूझ से अपराधियों को रोकने की कोशिश भी करते हैं. इसी को Social Policing भी कहा जाता है. मां हमेशा अपने बच्चे और चुनौतियों के बीच दीवार बनकर खड़ी होना जानती हैं और इस दीवार को मजबूती देने का काम हमारा समाज करता है और ये वीडियो इसी का प्रमाण है.
लाठियों के साथ युद्ध करतीं शांताबाई
ऐसा ही एक वीडियो पुणे से भी आया है जिसमें 85 साल की एक बुज़ुर्ग महिला लाठियों के साथ युद्ध की एक कला का प्रदर्शन कर रही हैं. ये वीडियो सोशल मीडिया पर आपने भी जरूर देखा होगा. 85 साल की इस बुज़ुर्ग का नाम है शांता बाई. जो अपने परिवार के पालन पोषण के लिए इस उम्र में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं. शांताबाई का ये वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है. लोग उनकी तारीफ में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख रहे हैं और उन्हें आर्थिक मदद देने के लिए भी आगे आ रहे हैं.
युद्ध की इस कला को कलारीपयट्टू कहते हैं. कलारीपयट्टू को भारतीय मार्शल आर्ट भी कहा जाता है. इसके जिस हिस्से में लाठियों का इस्तेमाल होता है उसे वाडी वीशू कहा जाता है. शांताबाई वाडी वीशू का ही प्रदर्शन कर रही हैं, जिसे देखकर लोग हैरान हो जाते हैं. शांताबाई का कहना है कि कोविड 19 की वजह से कमाई के सारे साधन रुक गए हैं और इसीलिए वो इस कला का प्रदर्शन करके कुछ पैसे कमाने की कोशिश करती हैं. शांताबाई ये सब कुछ अपने पोते पोतियों के लिए कर रही है जो इस समय पढ़ाई कर रहे हैं और वो चाहती हैं कि उनकी पढ़ाई में किसी तरह की रुकावट ना आए.
शांताबाई के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि उन्होंने कई पुरानी हिंदी फिल्मों में बतौर सह-कलाकार काम भी किया है. शांताबाई का कहना है कि उन्होंने ये कला 8 वर्ष की उम्र में अपने पिता से सीखी थी और वो आज भी इसका अभ्यास और प्रदर्शन करती हैं.
ये शक्ति और जज्बा सिर्फ ‘मां’ में
पूरी दुनिया में इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हैं, जब एक मां ने अपने बच्चे के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी. वर्ष 2016 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक मां अपने बच्चे को बचाने के लिए दो खतरनाक डॉग्स से भिड़ गई थी. घर के लॉ में खेल रहे बच्चे पर दो डॉग्स ने हमला कर दिया था. बच्चे की मां ने इसे देखा तो वो तुरंत अपने बच्चे को बचाकर घर के अंदर जाने की कोशिश करने लगी. पांच मिनट तक दोनों डॉग्स उन पर हमला करते रहे. लेकिन बच्चे के लिए मां एक ढाल की तरह खड़ी हो गई. इस हमले में मां और बच्चे, दोनों बहुत जख्मी भी हो गए थे, लेकिन जान पर खेलकर इस मां ने आखिरकार, अपने बच्चे को दोनों खूंखार डॉग्स से बचा लिया.
अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी से भी भिड़ जाने का जज्बा सिर्फ एक मां में ही हो सकता है. इसका एक उदाहरण अमेरिका के ह्यूस्टन में वर्ष 2018 को भी दिखा था, जब एक घर में भयानक आग लग गई थी. तब उस घर में आग के बीच, एक महिला और उसके तीन बच्चे फंस गए थे. जब तक फायर ब्रिगेड की टीम वहां नहीं पहुंची, तब तक इस महिला ने घर की बालकनी में खुद को आग की तरफ रखा और अपने बच्चों को आग से दूर, सुरक्षित जगह पर खड़े रहने की जगह दी. जब फायर ब्रिगेड टीम वहां पर पहुंची, तो महिला ने पहले बच्चों को बचाने के लिए कहा. फायर फाइटर्स ने कुछ ही देर में तीनों बच्चों और उनकी मां को भीषण आग से बचा लिया था.
मां की ये शक्ति और मां का ये जज्बा सिर्फ इंसानों में ही नहीं दिखता, जानवरों में भी मां का रूप, वही होता है, जो इंसानों में होता है. हम आपको जंगली जानवरों की कुछ तस्वीरें दिखा रहे हैं. इसमें भी आपको अपने बच्चे के प्रति एक मां की ममता दिख जाएगी. और जब खतरा होता है, तो ये मां, अपने बच्चे की जान बचाने के लिए खतरनाक से खतरनाक जानवरों से भिड़ जाने की ताकत रखती है.
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