नई दिल्ली: हॉन्ग-कॉन्ग (Hong Kong) के लिए एक नया सुरक्षा कानून पेश करने के चीन के कदम के बाद ब्रिटिश विदेश सचिव डॉमिनिक रैब (Dominic Raab) ने चीन की ईमानदारी पर सवाल उठाया है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा है कि इस कदम के बाद चीन (China) पर कैसे भरोसा किया जा सकता है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाएगा. जाहिर है, यह कानून चीन को क्षेत्र सौंपने वाले ऐतिहासिक समझौते का उल्लंघन है.
रैब ने कहा, ‘यह विश्वास का विषय है और दुनिया भर के बहुत से देश यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या चीन अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करता है? क्योंकि यदि उस पर हॉन्ग-कॉन्ग पर अपनी बात रखने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है, तो यह भरोसा कैसे किया जाए कि वह अपनी व्यापक अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाएंगा?’
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बता दें कि ब्रिटेन में चीन के राजदूत लियू शियाओमिंग द्वारा लगाए गए आरोप के बाद रैब की यह टिप्पणी आई है. लियू ने हॉन्ग-कॉन्ग में नए सुरक्षा कानून पर ब्रिटेन के टिप्पणी करने को चीन के आंतरिक मामलों में ‘हस्तक्षेप’ करार दिया था.
लंदन ने कहा है कि यह कानून पुलिस को विशेष परिस्थितियों में बिना वारंट के संपत्ति की जांच करने और उनको जब्त करने जैसे अधिकार देता है. अमेरिका ने चीन और हॉन्ग-कॉन्ग के अधिकारियों को इस कानून के लिए जिम्मेदार ठहराया है.
मानवाधिकारों के हनन और अपराध में शामिल विदेशी अधिकारियों को लेकर मैग्नेटस्की-शैली के प्रतिबंधों के पारित होने के बाद हाउस ऑफ कॉमन्स में रैब से इस कानून में चीन को निशाना बनाने को लेकर भी सवाल पूछे गए.
हाउस ऑफ कॉमन्स में रैब ने कहा, ‘हम पहले से ही इसपर काम कर रहे हैं कि अगला कदम क्या हो सकता है.’
बता दें कि रैब ने सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में नए नियमों की घोषणा करते हुए प्रतिबंधों का भी विवरण दिया.


