52वें अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह का चौथा दिवसदक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा, सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊँचाइयों का भव्य उत्सव

छतरपुर। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के चौथे दिवस में दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों—भरतनाट्यम, कथकली और कुचिपुड़ी—की दिव्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कला, साधना और अध्यात्म की गहन अनुभूति कराई। खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों की पृष्ठभूमि में सजे मंच पर कलाकारों का स्वागत पूर्व अपर मुख्य सचिव जे.एस. कंसोटिया, अकादमी निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर एवं उप निदेशक शेखर करहाड़कर ने पुष्पगुच्छ, शॉल व श्रीफल भेंट कर किया।

भरतनाट्यम से सजी संध्या

चौथे दिवस का शुभारंभ चेन्नई की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना व अभिनेत्री नव्या नायर की भरतनाट्यम एकल प्रस्तुति से हुआ। वर्णम् में देवी मीनाक्षी की कथा (राग खमाज, आदि ताल; रचनाकार मुथैया भागवत) की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और समापन में पूर्वी तिल्लाना ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। संगत में प्रीति महेश (गायन), हेमंत लक्ष्मण (नटवांगम), प्रबल जीत (मृदंगम) और के.पी. नंदिनी (वायलिन) रहे।

कथकली में प्रेम, पराक्रम और सम्मान

द्वितीय प्रस्तुति में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर ने कथकली में “सुभद्रहणम्” का सशक्त मंचन किया। महाभारत आधारित इस प्रस्तुति में अर्जुन–सुभद्रा प्रसंग, श्रीकृष्ण की सूझबूझ और बलराम के भावों को प्रभावी मुखाभिनय, वेशभूषा और पारंपरिक वाद्यों—चेंडा, मद्दलम्—के साथ जीवंत किया गया।

कुचिपुड़ी में नवदुर्गा का दिव्य आलोक

समापन पद्मश्री डॉ. जी. पद्मजा रेड्डी (हैदराबाद) की कुचिपुड़ी नृत्य-नाटिका “नवदुर्गा” से हुआ। देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की शक्ति, करुणा और आध्यात्मिक तेज ने मंच को देवीमय आलोक से भर दिया। नृत्य, संगीत और भावाभिनय के समन्वय ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।इस प्रकार, खजुराहो नृत्य समारोह का चौथा दिवस भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की गरिमा, विविधता और आध्यात्मिक ऊँचाइयों का यादगार उत्सव बनकर उभरा।

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