how to increase memory: ताउम्र बेहतर याददाश्त के लिए प्रभावी हैं ये एक्सर्साइज – role of exercise to increase memory in hindi

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हालही हुई कई स्टडीज में सामने आया है कि तेज गति से की जानेवाले एक्सर्साइज दिमाग की सेहत और यादाश्त को दुरुस्त रखने में मददगार हैं। खास बात यह है कि केवल युवाओं में ही नहीं इन फास्ट एक्सर्साइज का सकारात्मक प्रभाव 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में भी देखने को मिलता है। इस बारे में जब हमें एक्सपर्ट्स से बात की तो पाया कि उम्र के अनुसार कोई भी एक्सर्साइज यदि नियमित रूप से की जाए तो दिल और दिमाग और शरीर पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं…

हैमिल्टन के मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 12 सप्ताह तक 60 से 88 वर्ष की आयु के बीच के 64 सेडेंटरी (ज्यादातर समय बैठे रहनेवाले लोग) लोगों पर शोध किया। इस दौरान इन लोगों के ग्रुप को तीन भागों में बांटा, जिन्हें अलग-अलग तरह की एक्सर्साइज कराई गईं। इन लोगों के यह शोध शुरू करने से पहले और शोध के बाद लिए गए डेटा विश्लेषण में सामने आया कि जो एडल्ट तीव्र गति वाली अक्सर्साइज करते हैं उनमें अल्जाइमर होने का रिस्क कम होता है। साथ ही उनकी यादाश्त पहले के मुकाबले कहीं बेहतर हो जाती है।

याददाश्त बढ़ाने का आसान तरीका

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इनको कराई गई तीव्र गति वाली एक्सर्साइज में 4 मिनट तक ट्रेड मिल वॉक के चार सेट और मीडियम तीव्रता वाली एरोबिक्स एक्सर्साइज शामिल थीं, जो इन्हें हर रोज करीब 50 मिनट तक कराई जाती थीं। शोध में यह भी सामने आया कि धीमी गति से लंबे समय तक की जानेवाली एक्सर्साइज की तुलना में अधिक प्रभाव डालने वाली तीव्र गति की एक्सर्साइज कम समय तक करना ब्रेन के लिए अधिक प्रभावी रहता है। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह बात भी साफ कर दी कि इस तरह का व्यायाम लोगों को डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचाने में मददगार है अगर ये ऐक्टिविटीज किसी एक्सपर्ट की देखरेख में की जाएं। लेकिन बीमारी हो जाने पर उन्हें ठीक करने में इनके रोल के बारे में अभी कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता।

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क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स?

-फिटनेस ट्रेनर हरेंद्र गौतम के अनुसार, एक्सर्साइज कोई सी भी हो, सभी को अगर ठीक तरह से किया जाए तो उनका लाभ हमारे शरीर के साथ ब्रेन को भी मिलता है। उदाहरण के लिए अगर हम सबसे आसान शवासन की बात करें तो इस योगासन को करते समय हमारा शरीर पूरी तरह शिथिलावस्था में रहता है। लेकिन इस दौरान हमारा दिमाग भी रिलैक्स होता है। इससे हैपी हॉर्मोन्स बढ़ते हैं और हम बेहतर फील करते हैं।

याददाश्त बढ़ाता है प्राणायाम

ब्रेन पर इस तरह काम करती हैं एक्सर्साइज

-आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर सुरेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि एरोबिक्स, योग या मॉर्निंग वॉक। व्यक्ति चाहे जो भी एक्सर्साइज करे अगर इसे नियमित रूप से और सही तरह से करता है तो शरीर के साथ ही दिमाग भी स्वस्थ रहता है। क्योंकि प्राणायाम से लेकर जॉगिंग तक या एरोबिक्स से लेकर योग तक हर ऐक्टिविटी हमारे ब्रेन में ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ानेवाली होती है। जो मेमरी से जुड़े हॉर्मोन्स से सीक्रेशन को बढ़ाने में सहायक होती है।

-इसके साथ ही जब हमारे शरीर में ऑक्सीजन आवश्यकता के अनुसार होती है तो हम खुद को अधिक ऊर्जावान अनुभव करते हैं और कोई भी काम अधिक फोकस के साथ कर पाते हैं। इससे भी हमारी याददाश्त अच्छी होती है।

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