नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहली बार हुए वर्चुवल शिखर सम्मेलन के बाद दिए अपने पहले इंटरव्यू में यहां ऑस्ट्रेलिया के राजदूत बैरी ओ फैरेल ने कहा है कि हिंद महासागर (Indian Ocean) की सुरक्षा के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं. भारत और आस्ट्रेलिया ने एक दूसरे से लक्ष्य भी साझा किए हैं. आस्ट्रेलिया के राजदूत ने कहा, ‘दोनों देश बहुपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए अपना दृष्टिकोण साझा करते हैं.’ आस्ट्रेलिया और भारत के बीच गुरुवार को पहला वर्चुवल शिखर सम्मेलन हुआ था, जिसमें दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने पर जोर दिया. ये हैं Zee News संवाददाता सिद्धांत सिब्बल के साथ आस्ट्रेलिया के भारत में राजदूत बैरी ओ फैरेल के इंटरव्यू के प्रमुख अंश.
सवाल- प्रथम भारत ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन का मुख्य परिणाम क्या निकला है?
जवाब- हालिया कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कई साझा लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में मिलजुलकर काम किया है. उदाहरण के तौर पर इंडो पैसिफिक (हिंद प्रशांत क्षेत्र) रीजन की बात हो या फिर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत करना ताकि वे हमारे नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर सकें. इन दिशाओं में दोनों देशों ने मिलकर काम किया है. ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक देशों के लिए यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि वे इस क्षेत्र को और अधिक बेहतर बनाएं. मुझे विश्वास है कि वर्चुवल शिखर सम्मेलन रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से चरम बिंदु है. रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, विज्ञान और अनुसंधान महत्वपूर्ण आपूर्ति जैसे बिंदुओं पर दोनों देशों की साझेदारी चल रही है.
सवाल- कैसे लॉजिस्टिक पैक्ट भारत और ऑस्ट्रेलिया की फोर्स के बीच सहयोग को बढ़ाएगी?
जवाब- ऑस्ट्रेलिया और भारत अपने रक्षा संबंधों को और भी बड़े स्तर पर ले जाने में सफल हुए हैं. आपसी लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट और कोरोलेरी डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट पर भी सहमति हुई. दोनों देशों के रक्षा संबंध पहले से ऐतिहासिक स्तर पर हैं.
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सवाल- शिखर सम्मेलन के दौरान चीन पर चर्चा हुई? इंडो पैसिफिक के संदर्भ में, हमने दक्षिण चीन सागर से लेकर लद्दाख तक का विजन स्टेटमेंट देखा.
जवाब- नेताओं ने व्यापक क्षेत्रीय गतिशीलता पर फोकस किया. जैसा कि पीएम मोदी ने कहा, ऑस्ट्रेलिया और भारत को इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि हमारे क्षेत्र और दुनिया में स्थिरता को लेकर कैसे ध्यान केंद्रित किया जा सकता है. हमने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए अपने रिश्ते मजबूत किए हैं. नए क्षेत्रों जैसे महत्वपूर्ण खनिज, साइबर में एक साथ अपने काम का विस्तार किया है. हम दोनों समुद्री शक्तियां हैं, हम हिंद महासागर से अलग हो गए हैं. न केवल हमारे लिए बल्कि सभी देशों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक साझा लक्ष्य और जिम्मेदारी में शामिल हो गए हैं.
सवाल- कैसे दोनों देशों ने क्वाड जैसे विभिन्न प्रारूपों के तहत समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है?
जवाब- भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही अंतरराष्ट्रीयता के लिए प्रतिबद्धता साझा करते हैं, दोनों ही मुद्दों को सुलझाने के लिए बहुपक्षवाद, द्विपक्षीयवाद और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का उपयोग करने के बारे में एक दृष्टिकोण रखते हैं. अब, क्वाड हमेशा की तरह महत्वपूर्ण बना हुआ है, यह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए एक बहुत ही उपयोगी स्थल साबित हो रहा है. जो समुद्री और साइबर सुरक्षा और आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे दृष्टिकोण को समन्वित करेगा. कोरोना वायरस को लेकर विदेशी राजदूतों दक्षिण कोरिया, जापान, न्यूजीलैंड, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के कॉलग्लोल्स के साथ नियमित रूप से बात होती है. COVID के बारे में और आपूर्ति श्रृंखलाओं के बारे में हम चर्चा करते हैं.
सवाल- वर्चुअल कूटनीति ने दुनिया को बदल दिया है, क्या यह भविष्य है?
जवाब- पीएम मोदी ने संकट के समय दुनिया के नेताओं तक पहुंचने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में 150 से अधिक देशों की सहायता की है. पीएम मोदी ने इसे अवसर के रूप में बदला है. कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान भी पीएम मोदी सफलतापूर्वक संपर्क में रहे हैं.
सवाल- क्या मालाबार के लिए ऑस्ट्रेलियाई भागीदारी पर चर्चा की गई थी?
जवाब- ऑस्ट्रेलिया मालाबार में रुचि रखता है, इसमें भाग लेने के लिए बदलाव का स्वागत करेगा. लेकिन जैसा कि मैंने कहा है, मुझे विश्वास नहीं है कि मालाबार आगे बढ़ेगा या नहीं. वास्तव में हमारे रक्षा संबंध बीते 6 सालों में मजबूत हुए हैं.

