June 30, 2020

India, Bhutan sign agreement on 600 MW Kholongchhu Hyrdroelectric Project pact| भारत-भूटान के संबंध हुए और मजबूत, पनबिजली परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली: चीन और नेपाल से चल रहे सीमा विवाद के बीच भारत (India) ने भूटान (Bhutan) से संबंधों को मजबूती देने के लिए कदम आगे बढ़ाया है. दोनों देशों के बीच संयुक्त उपक्रम वाली 600 मेगावाट की खोलोंगछू पनबिजली परियोजना (Kholongchhu Hydroelectric Project -KHEL) के करार पर दस्तखत हुए हैं. सोमवार को हुए दस्तखत के साथ ही इसके निर्माण और अन्य कार्यों का रास्ता साफ हो गया है. 

इस परियोजना के साथ ही भूटान में पहले ज्वाइंट वेंचर की शुरुआत होगी. यह समझौता भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) और भूटान की ड्रूक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीजीपीसी) के बीच हुआ है. भारतीय विदेशमंत्री डॉ. एस. जयशंकर (Dr. S Jaishanka) समझौते के हस्ताक्षर समारोह में वीडियो कांफ्रेंस के जरिये शरीक हुए. उन्होंने करार पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “करार पर हस्ताक्षर से भारत और भूटान के बीच पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का निर्माण और अन्य गतिविधियां शुरू हो सकेंगी. साथ ही भूटान में आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा होंगे”.

इस मौके पर भूटान के विदेशमंत्री तांदी दोरजी (Tandi Dorji) ने कहा, ‘यह हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट परस्पर फायदेमंद द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ है. पनबिजली परियोजनाएं दोनों देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हमारी अर्थव्यवस्थाओं को आगे बढ़ाएंगी, हमारे लिए समृद्धि लाएंगी और ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, करेंगी’. 

इस प्रोजेक्ट के बाद खोलोंगछू से सालाना लगभग 2568.88 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है. भूटान में भारतीय राजदूत रुचिरा कंबोज (Ruchira Kamboj) ने इस तरह की पिछली परियोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मौजूदा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट दर्शाता है कि भारत और भूटान मजबूत द्विपक्षीय संबंध रखते हैं और एक-दूसरे की भलाई के लिए काम करते हैं. गौरतलब है कि भूटान के चूका, कुरिछु, ताला, और मंगदेछु में भी इस तरह की परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं. 

उन्होंने आगे कहा, ‘भूटान के महाराज और भारत के प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं और यह सातवीं पनबिजली परियोजना (पुना- I और पुना- II का कार्य प्रगति पर है) इसका उदाहरण है’. भारत ने हाल ही में 720 मेगावाट के मंगदेछु हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (Mangdechhu Hydro Electric Power Project) को पूरा किया है और दोनों पक्ष अन्य परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं. जिसमें 1200 मेगावाट की पुनातंछू (Punatsangchhu) -1 और 1020 मेगावाट की पुनातंछू-2 परियोजनाएं शामिल हैं.

 




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *