नई दिल्ली – भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध एक नए तनाव से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत को निशाना बनाते हुए भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% बढ़ा दिया है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है। यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से लगातार रूसी तेल खरीद पर भारत की स्थिति पर अमेरिकी असंतोष को दर्शाता है।
हालांकि, इस घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। यदि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देता है, तो इसका वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत, जो कि दुनिया में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, के अचानक पीछे हटने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल जाएगी।
दूसरी ओर, विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था पर खास असर नहीं पड़ेगा। भारत के पास अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई अन्य विकल्प मौजूद हैं। साथ ही, घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति की गतिशीलता को देखते हुए, यह वृद्धि भारतीय उद्योगों पर बहुत अधिक दबाव नहीं डालेगी। इसके अलावा, भारत ने पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के माध्यम से अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाई है, जिससे अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव सीमित हो सकता है।