लंदन: आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) में शामिल होने के लिए ब्रिटेन (UK) से सीरिया (Syria) गई युवती को वापस लंदन वाले की अनुमति मिल गई है. ब्रिटेन की एक अदालत ने शमीमा बेगम (Shamima Begum) को राहत प्रदान करते हुए कहा है कि वह अपनी नागरिकता रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने के लिए लंदन वापस आ सकती हैं.
अदालत ने कहा कि 20 वर्षीय शमीमा बेगम यदि सीरिया के शरणार्थी शिविर में रहकर अपना केस लड़ती हैं, तो वह इस प्रक्रिया में सार्थक भूमिका नहीं निभा पाएंगी और उन्हें निष्पक्ष एवं प्रभावी अपील का अधिकार भी नहीं मिलेगा. इसलिए शमीमा को लंदन आने की अनुमति दी जाती है.
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समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बेगम 15 साल की उम्र में अपने स्कूल की दो लड़कियों के साथ 17 फरवरी, 2015 को लंदन स्थित अपने घर से भागकर आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए सीरिया चली गई थीं. आईएस-नियंत्रित क्षेत्र पहुंचने के बाद उन्होंने एक डच युवक से शादी की और जब फरवरी 2019 में एक शरणार्थी शिविर में उनके बारे में पता चला तो वह नौ महीने की गर्भवती थीं.
बेगम के बच्चे की मौत जन्म लेने के तुरंत बाद हो गई, जबकि उसके दो अन्य बच्चों ने ISIS की आतंकी गतिविधियों के चलते जान गंवा दी. इस बीच, तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनकी ब्रिटेन की नागरिकता रद्द कर दी. इस फैसले के खिलाफ बेगम ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. अपनी अपील में उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला अमानवीय व्यवहार को बढ़ावा देगा और उनकी जान के लिए खतरा बढ़ जाएगा.
वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार अदालत के फैसले से निराश है और यह सुनिश्चित करने के लिए अपील करेगी कि मामले की सुनवाई से पहले बेगम लंदन वापस न लौट सकें.
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