जम्मू-कश्मीर: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की भारी गोलाबारी से जम्मू-कश्मीर के पुंछ, राजौरी, उरी और कुपवाड़ा सेक्टर में जिन घरों को भारी नुकसान हुआ था, उन पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा दिया जा रहा मुआवजा अब मजाक का पात्र बन गया है। सरकार ने पूरी तरह से तबाह हो चुके घर के लिए मात्र ₹1.30 लाख और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घर के लिए ₹10 हजार का मुआवजा तय किया है, जिसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले इन परिवारों ने पाकिस्तान की गोलीबारी में अपने आशियाने गंवा दिए। उनकी जिंदगियां तबाह हो गईं और अब सरकार का यह ‘मुआवजा’ उनके दर्द को और बढ़ा रहा है। प्रभावित लोगों का कहना है कि ₹1.30 लाख में आज के दौर में एक छोटा कमरा बनाना भी मुश्किल है, घर बनाना तो दूर की बात है। वे इस मुआवजे को अपनी त्रासदी के साथ किया गया एक क्रूर मजाक बता रहे हैं।
यह स्थिति सरकारी संवेदनहीनता और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ जहां सीमावर्ती इलाकों के लोग लगातार खतरों का सामना करते हुए जीवन जीते हैं, वहीं दूसरी तरफ आपदा आने पर उन्हें पर्याप्त सहायता भी नहीं मिलती। स्थानीय निवासियों ने सरकार से इस मुआवजे राशि पर पुनर्विचार करने और पीड़ितों को उचित सहायता प्रदान करने की मांग की है ताकि वे अपने घरों का पुनर्निर्माण कर सकें और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।