पण्डोखर धाम महोत्सव पर पुष्पावती तट पर पहली बार हुई सामूहिक गंगा आरतीगुरुशरण महाराज ने कहा अगले वर्ष से होगा शाही स्नान

दतिया पण्डोखर धाम महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम को 6ः30 बजे पुष्पावती गंगा की आरती होगी और पण्डोखर धाम में पुष्पावती गंगा (पहुज) के तट पर अगले वर्ष से शाही स्नान भी प्रारंभ होगा जिसमें परंपरागत नागा अखाड़े के साधु – संत महात्मा भाग लेंगे। पण्डोखर धाम महोत्सव के अवसर पर मंगल कलश यात्रा के दौरान संपन्न हुई भव्य पुष्पावती गंगा की सामूहिक आरती के दौरान उक्त घोषणा पण्डोखर धाम पीठाधीश्वर श्री गुरुशरण जी महाराज ने की। श्री गुरुशरण जी महाराज ने कहा की पुष्पावती प्राचीन नदी है जिसका महाभारत के वनपर्व में उल्लेख है और अब क्षेत्र में इसकी महत्ता बढ़ रही है। साथ ही पण्डोखर धाम के प्रति लोगों में अगाध आस्था , श्रद्धा और भक्ति का भाव है इसलिए अगले वर्ष उनका यह प्रयास होगा की पुष्पावती गंगा के तट पर शाही स्नान की परंपरा प्रारंभ हो, जिसमें सभी अखाड़ों के संत, महंत और साधु महात्मा भी भाग लें।

श्रीहनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पण्डोखर धाम में आयोजित तीसवें पण्डोखर महोत्सव के तहत भव्य मंगल कलश यात्रा का आयोजन बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया गया। यह भव्य शोभायात्रा पण्डोखर धाम पीठाधीश्वर श्री गुरुशरण जी महाराज के सान्निध्य में निकाली गई, जिसमें क्षेत्र सहित देश- विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कलशयात्रा में बुंदेलखंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट एवं शस्त्रकला का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला। सैकड़ों अखाड़ों के कार्यकर्ता एवं डमरू दल के सदस्य भजनों की मधुर धुन पर डमरू बजाते और नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे।

वहीं बुंदेलखंड की प्राचीन ‘सोवत’ कला के माध्यम से कलाकारों ने भजन प्रस्तुत किए और महिला वेष में नृत्य कर सांस्कृतिक विरासत का मनमोहक प्रदर्शन किया। शोभायात्रा में सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं का विशेष आकर्षण खींचा। रथों पर सवार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी एवं हनुमान जी के पात्रों ने भक्तिमय वातावरण बना दिया। वहीं माता महाकाली रौद्र रूप में राक्षसों का संहार करती हुई नजर आईं। श्री राधा- कृष्ण के सजीव पात्रों ने रासलीला प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह भव्य यात्रा पुष्पावती तट पर पहुंची, जहां पहली बार सामूहिक गंगा आरती का आयोजन किया गया।

काशी एवं प्रयागराज से आए विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत गंगा आरती संपन्न कराई गई। इस दौरान जूना अखाड़ा के पूज्य महामंडलेश्वरों सहित सैकड़ों साधु- संतों ने सहभागिता निभाई। श्री गुरुशरण जी महाराज ने भी अपने परिवारजनों एवं शिष्यों के साथ गंगा आरती में भाग लिया। गंगा आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। तट के एक ओर मंच से पंडितों द्वारा आरती की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर हजारों श्रद्धालु भक्तों ने भी दीप जलाकर गंगा आरती में सहभागिता की। अखाड़ों और डमरू दलों ने अपने प्रदर्शन से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

शोभायात्रा ग्राम के विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हुए श्रीराम महायज्ञ स्थल पर पहुंची, जहां हजारों महिलाओं ने सिर पर धारण किए कलश स्थापित किए। तीन अप्रैल से श्रीराम महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। प्रतिदिन व्यासपीठ से पंडित विनोद शास्त्री जी महाराज (वृंदावन धाम) द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया जा रहा है, जो नौ अप्रैल तक चलेगी। इसके पश्चात दस अप्रैल से पंडित ब्रजरज अभिषेक वशिष्ठ (उत्तराखंड) द्वारा हनुमत कथा का आयोजन किया जाएगा।

कलश यात्रा के उपरांत सांस्कृतिक मंच पर बुंदेलखंड की पारंपरिक जवाबी कीर्तन प्रतियोगिता आयोजित की गई। पण्डोखर धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं सचिव मुकेश कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बतलाया कि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन रामलीला का मंचन एवं विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।चार अप्रैल को सौम्या बुधोलिया एंड ग्रुप तथा खनिजदेव चैहान एंड ग्रुप द्वारा भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी, वहीं पांच अप्रैल को बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगायक जयसिंह राजा एंड ग्रुप अपनी प्रस्तुति देंगे। उन्होंने क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में भाग लेकर इसे सफल बनाने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत कर रहा है।

वाइट – पंडोखर गुरुशरण महाराज

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