छतरपुर, 23 जुलाई, 2025: कहते हैं कि जब किस्मत का पहिया घूमता है, तो राजा से रंक और रंक से राजा बनने में देर नहीं लगती. छतरपुर के छोटे से गाँव कटिया में रहने वाले मजदूर दंपति हरगोविंद यादव और उनकी पत्नी पवन देवी यादव के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. पिछले पाँच सालों से हीरे की तलाश में खदानों में कड़ी मजदूरी कर रहे इस दंपति को अचानक खुदाई के दौरान आठ हीरे मिले हैं, जिनमें कुछ अच्छी गुणवत्ता वाले और कुछ कच्चे हीरे शामिल हैं.
हरगोविंद और पवन देवी, जिनके हाथों में अब भी दिन-रात की मेहनत के छाले पड़े हुए हैं, उन्होंने लगभग पाँच साल तक हीरे की खोज में अपनी जिंदगी लगा दी. यह उनकी अथक मेहनत और अटूट धैर्य का ही नतीजा है कि आज उनकी किस्मत ने नई करवट ली है.यह इस परिवार के लिए हीरे मिलने का पहला मौका नहीं है. इससे पहले, हरगोविंद के छोटे भाई को भी एक हीरा मिला था, जिसकी कीमत करीब ढाई से तीन लाख रुपये थी. लेकिन, जानकारी के अभाव में उन्हें उस हीरे के सिर्फ एक लाख रुपये ही मिल पाए थे, जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा था.
हालांकि, इस बार आठ हीरे मिलने से मजदूर दंपति की किस्मत पूरी तरह चमक उठी है. शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इन आठ हीरों की कीमत 10 से 12 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है. इन हीरों को पहले संग्रहालय में जमा किया जाएगा, जहाँ उनका विधिवत परीक्षण होगा और उसके बाद ही उनकी वास्तविक कीमत का आकलन किया जा सकेगा. यह घटना हरगोविंद और पवन देवी यादव के लिए किसी सपने के सच होने जैसी है, जो उनकी सालों की मेहनत और संघर्ष का मीठा फल है.