मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निगमों को निर्देश दिए हैं कि आगामी बजट में ‘महापौर निधि’ के लिए कोई विशेष प्रावधान न रखा जाए।विभाग के उप सचिव प्रमोद कुमार शुक्ला द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 में महापौर निधि का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए बजट तैयार करते समय नियमों का ही पालन किया जाए।इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में पड़ सकता है, जहां महापौरों को पहले 10-10 करोड़ रुपए तक की निधि दी जा रही थी। भोपाल में महापौर मालती राय की निधि 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ की गई थी, वहीं इंदौर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पास भी 10 करोड़ रुपए का फंड था।पिछले साल महापौर, निगम अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य और पार्षदों की निधि भी बढ़ाई गई थी। हालांकि नए आदेश के बाद अब यह संशय है कि अगले बजट में ये राशियां स्वीकृत होंगी या नहीं।महापौरों का कहना है कि इस निधि से शहर में सड़क, नाली और अन्य छोटे विकास कार्य तेजी से कराए जाते हैं। यदि निधि बंद होती है तो छोटे कार्यों के लिए भी लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।


