भोपाल/सीधी:मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने अपने 27 महीनों के कार्यकाल में नौकरशाही को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। जनता से बदसलूकी और काम में लापरवाही के आरोपों के चलते अब तक कम से कम 8 जिला कलेक्टरों को उनके पद से हटाया जा चुका है।
ताजा मामला सीधी का है, जहां कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को जन शिकायतों के बाद हटाने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार ने सिर्फ सीधी ही नहीं, बल्कि अशोक नगर, मऊगंज, सागर, सिवनी, हरदा, शाजापुर और गुना के कलेक्टरों पर भी कार्रवाई की है।
हालांकि, इन सख्त कार्रवाइयों के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। कई मामलों में हटाए गए अफसरों को कुछ ही दिनों में दूसरी अहम जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। उदाहरण के तौर पर, इंदौर के पूर्व नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को दूषित जल मामले में हटाया गया, लेकिन महज 15 दिन के भीतर उन्हें पर्यटन विकास निगम का एमडी नियुक्त कर दिया गया।ऐसे में सरकार की सख्ती और बाद में ‘री-पोस्टिंग’ के इस पैटर्न पर सवाल उठने लगे हैं।


