एम्सटर्डम: राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोप आम हैं और अक्सर नेताओं का इसका सामना करना पड़ता है, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देने का साहस बहुत कम लोग ही दिखा पाते हैं. नीदरलैंड (Netherlands) के प्रधानमंत्री मार्क रूटे (Mark Rutte) और उनकी पूरी कैबिनेट ने इस ‘साहस’ का परिचय दिया है. रूटे और उनके मंत्रियों ने चाइल्ड केयर सब्सिडिज (Child Care Subsidies) से जुड़े से घोटाले की राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया.
King को दी जानकारी
प्रधानमंत्री मार्क रूटे (Mark Rutte) ने सबसे पहले इस फैसले के बारे में किंग विलियम एलेंक्जेंडर को जानकारी दी और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी मंत्रियों सहित सामूहिक इस्तीफा देना का ऐलान किया. इस दौरान, देश को संबोधित अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने फैसले के बारे में नीदरलैंड के सम्राट को सूचित कर दिया था और वादा किया कि सरकार प्रभावित माता-पिता को जल्द से जल्द मुआवजा देने और कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए काम करना जारी रखेगी.
ऐसे हुआ Scam
इस घोटाले का खुलासा पिछले महीने एक संसदीय जांच में हुआ था. जांच में पता चला था कि करीब 10,000 परिवारों पर अनुचित रूप से धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया, फिर उन्हें सब्सिडी में हासिल किए हजारों यूरो की रकम सरकार को वापस देने पर मजबूर किया गया. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस घोटाले की वजह से हजारों लोग बेरोजगारी, दिवालियापन और यहां तक की तलाक की कगार तक पहुंच गए हैं.
ये भी पढ़ें -Donald Trump पर फूटा Beijing का गुस्सा, US-China के बीच अब इसलिए तनाव
Party को वापसी की उम्मीद
PM ने आगे कहा कि हम सभी का मानना है कि यदि पूरी प्रणाली विफल हो गई है तो, हम सभी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए. रूटे की सरकार 17 मार्च को नीदरलैंड में चुनाव के बाद नई सरकार के गठन होने तक कार्यभार संभालेगी. हालांकि प्रधानमंत्री की पार्टी को चुनाव जीतने की उम्मीद है. पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री मार्क रूटे द्वारा किए गए बेहतरीन कार्यों की बदौलत हम सत्ता में वापसी जरूर करेंगे.
जनता के साथ ‘अभूतपूर्व अन्याय’
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में करीब एक दशक तक चलने वाले इस घोटाले को जनता के साथ अभूतपूर्व अन्याय बताया है. बता दें कि रूटे सरकार से पहले गुरुवार को विपक्ष में बैठी लेबर पार्टी के नेता ने पूरे मामले में अपनी भूमिका को लेकर इस्तीफा दे दिया था. उसी रात प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी के मंत्रियों के साथ बैठक की और अगले दिन सामूहिक इस्तीफा दे दिया. 2012 के बाद देश में इस तरह से सरकार गिरने का यह पहला मौका है.
VIDEO

