Nick Jonas fighting with Diabetes: Priyanka chopras husband nick jonas suffering from type 1 diabetes – खुद की इस बीमारी के चलते फेमिली मेंबर्स पर डिपेंड हैं प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस

जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के चलते डायबिटीज की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इससे मशहूर हस्तियों सहित दुनियाभर में लाखों लोग प्रभावित हैं। वैसे हम ऐसे बहुत से सिलेब्रिटीज को जानते हैं, जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं, लेकिन निक जोनस एक ऐसे सिलेब्रिटी हैं, जो 13 साल की उम्र से टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं।

अब उन्होंने इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई है। एक बातचीत में अमेरिकन सिंगर, एक्टर और प्रियंका चोपड़ा के पति जोनस ने डायबिटीज के निदान और उनके द्वारा अनुभव किए गए लक्षणों के बारे में खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि ‘शुरूआती निदान ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। इतने सालों में अब वह इस स्थिति को बेहतर तरीके से मैनेज करना सीख गए हैं और अच्छी क्वालिटी की लाइफ एन्जॉय कर रहे हैं’।

जुवेनाइल डायबिटीज में जीवनभर लेनी पड़ती है दवा-

निक जोनस टाइप 1 डायबिटीज से पीडि़त हैं। यह एक ऐसी स्थिति है , जिसमें शरीर का पैन्क्रियाज बहुत कम या बिना इंसुलिन का उत्पादन करता है। कम उम्र में इसे डायगनोज करना एक जेनेटिक डिसऑर्डर है। इसे अक्सर जुवेनाइल डायबिटीज के रूप में जाना जाता है। यह एक क्रॉनिक कंडीशन है, जिसके चलते व्यक्ति को जीवनभर दवा की जरूरत पड़ती है।

मधुमेह जागरूकता कार्यक्रम में उसी के बारे में बोलते हुए 29 वर्षीय जोनस ने कहा कि एक 13 वर्ष की उम्र में उनके साथ क्या हो रहा था, इस बारे में पूरी तरह से अनजान होने के कारण उन्हें बताया जा रहा था कि उन्हें डायबिटीज है, इससे उन्हें मौत का खतरा भी है। निक जोनस कहते हैं कि ‘जब मुझे पहली बार यह बीमारी डायग्नोज हुई थी, तो मैं अस्पताल में बैठा था और मौत से डर रहा था। लेकिन ईमानदारी से मैं इस नई चीज को प्रबंधित करने का तरीका सीख रहा था’।

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​अच्छी तरह से मैनेज हो सकती है टाइप-1 डायबिटीज

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जागरूकता बढ़ाने के लिए बियॉन्ड टाइप 1 नामक एक कार्यक्रम की सह स्थापना करने के बाद उन्होंने आगे कहा कि जहां कई लक्षणों , शुरूआती संकेतों और देखभाल करने के टिप्स के बारे में बात करना और शिक्षित होना जरूरी है। वहीं लोगों के लिए यह देखना भी मददगार है कि मधुमेह में जीवन को सीमित किए बिना अच्छी तरह से मैनेज किया जा सकता है। जोनस दूसरों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में काम करना चाहते हैं।

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​कैसे मैनेज की टाइप-1 डायबिटीज

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अपने सार्वजनिक निदान के बाद से जोनस अपने स्वास्थ्य के बारे में , लक्षणों और उसी के प्रबंधन के बारे में बात की। उन्होंने जुवेनाइल डायबिटीज की दवा को लेना जारी रखा है। उन्होंने यह भी बताया है कि ‘डायबिटीज में उन्हें कार्ब, भोजन का समय , ब्लड शुगर लेवल पर नजर बनाए रखनी पड़ती है। मधुमेह के सही प्रबंधन के लिए दवाएं और जीवनशैली में बदलाव दोनों जरूरी पहलू हैं’। जोनस कहते हैं कि, ‘मधुमेह एक शारीरिक और भावनात्मक लड़ाई है, जिसका समर्थन करना जरूरी है’।

​डायबिटीज वालों को है ज्यादा मदद और देखभाल की जरूरत

जहां एक तरफ हम पर्याप्त जागरूकता की बात करते हैं, वहीं जोनस को यह भी लगता है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों को जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ बहुत ज्यादा मदद और देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि यह एक ऐसी स्थिति है, जो जीवन के सभी हिस्सों को प्रभावित करती है। लगभग 16 वर्षों से इस स्थिति से जूझने के बाद निक कहते हैं कि वह अपनी पत्नी प्रियंका चोपड़ा , भाइयों जो और केविन पर बहुत निर्भर हैं।

​टाइप 1 डायबिटीज के शुरूआती लक्षण

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निक जोनस ने टाइप-1 डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताया कि 13 साल की उम्र में सबसे पहले उन्हें थकान के साथ तेजी से वजन घटाया। हालांकि डायबिटीज लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती है, इसलिए इसके शुरूआती संकतों के बारे में सर्तक रहना जरूरी है। इसके लक्षणों में प्यास बढ़ना, बार-बार पेशाब आना, चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव, भूख बढ़ना और यीस्ट इंफेक्शन शामिल है।

निक जोनस ने खुलेतौर पर जुवेनाइल डायबिटीज को लेकर बात की है। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए उनकी यह पोस्ट बहुत मददगार साबित हो सकती है।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

​दोस्तों और परिवार पर भी पड़ता है इस बीमारी का असर

जोनस कहते हैं ‘अच्छे दिन होंगे और बुरे दिन भी होंगे। मुझे लगता है कि इसका मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पहलू वास्तव में जरूरी है। मैं अपने डॉक्टर से बात करता हूं और सौभाग्य से मेरे पास चारों ओर मदद करने के लिए बहुत अच्छे लोग और डॉक्टर्स का बड़ा ग्रुप है। इस बीमारी का मानसिक और भावनात्मक प्रभाव न केवल मरीज पर बल्कि उसके दोस्त, परिवार के सदस्यों पर भी पड़ता है’।


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