मेकाहारा के चिकित्सक अपने खर्चे से फेस शील्ड बनाने की तैयारी में लग गए हैं, ताकि संदिग्धों की संख्या बढ़े या कोई संक्रमित मरीज भी आए तो वे संक्रमित होने से बचें। प्रदेश में कोरोना मरीजों की कम संख्या ने जहां रायगढ़ के डॉक्टरों का हौसला बनाया हुआ है वहीं देश में तेजी से बढ़ रही पॉजिटिव लोगों की संख्या से चिंता भी है। बार-बार मांग किए जाने के बाद भी कोरोना के खिलाफ योद्धा बने डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को अब तक पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट नहीं मिले हैं। लोगों की जान बचाने के साथ ही मेडिकल टीम को अपनी भी चिंता है। डॉक्टरों ने सुरक्षा उपकरणों की कमी होने पर भी चिंता जाहिर की है। सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों की टीम फेस शील्ड बनाएगी। ये शील्ड खास तकनीक से तैयार की जाएगी। इसमें पारदर्शी प्रोटेक्टिव प्लास्टिक का उपयोग किया जाना है। कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच ये फेस शील्ड डॉक्टरों सहित सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सहायक साबित हो सकता है। पीपीई पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट सिर से लेकर पैर तक इस्तेमाल किया जाता है। मेकाहारा के डॉक्टरों का मानना है कि फेस शील्ड से कम से कम सिर और चेहरे का बचाव होगा। फेस शील्ड हेलमेट जैसा हो, इससे जांच के दौरान कोरोना संदिग्ध या संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने पर वायरस से बचा जा सकेगा।
कॉलेज से नहीं मिला सामान, खुद खरीदा
फेस शील्ड बनाने के लिए अच्छी क्वालिटी के 3डी ट्रांसपेरेंट प्रोटेक्टिव प्लास्टिक के साथ ही स्टेपल पंच, रबर बैंड की आवश्यकता है। इसके लिए डाॅक्टरों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के समक्ष बात रखी। कई दिनों से पीपीई, मास्क की मांग कर रहे मेकाहारा ने अब इन सामग्री की भी डिमांड भेजी है। इसके आने में समय लगेगा तब तक डॉक्टरों ने खुद सामान खरीदकर फेस शील्ड बनाने की तैयारी की है।
खांसने व छींकने वालों के संक्रमण से बचाव
डॉ. गणेश पटेल, कोरोना ओपीडी प्रभारी


