- कोरोना वायरस जैसी गंभीर महामारी की रोकथाम को लेकर 22 मार्च से समूचे देश सहित जिले में लागू किए गए लाॅकडाउन के चलते जिले में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में कमी आने के साथ ही वातावरण में भी शुद्धता आई है
- प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सदस्य सचिव पी संगीता के मुताबिक जनवरी, फरवरी एवं 21 मार्च तक की तुलना में 22 मार्च से 3 अप्रैल तक लाॅकडाउन के इन 13 दिनों में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 7 गुना की कमी आई है
दैनिक भास्कर
Apr 05, 2020, 03:18 AM IST
बलौदाबाजार. (तारा परसवानी) कोरोना लॉकडाउन के बीच एक खबर सुकून देने वाली है कि लॉकडाउन के 13 दिनों (21 मार्च तक) में बलौदाबाजार शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई यानी वायु का गुणवत्ता सूचकांक) आश्चर्यजनक रूप से 76 पर आ गया है जो सामान्य दिनों में 100 से 120 के आसपास रहता है। और तो और इन 13 दिनों सड़क दुर्घटनाओं में भी 7 गुना कमी आई है।
जिला अस्पताल के डाॅक्टर अशोक वर्मा के अनुसार प्रदूषण का स्तर एक्यूआई 51 से 100 के बीच रहने पर केवल संवेदनशील लोगांे को ही सांस लेने में तकलीफ हो सकती है मगर सामान्य दिनों में जब शहर का प्रदूषण स्तर (एक्यूआई) 100-120 के बीच रहता है तो उस दौरान फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा और ह्रदय रोग, बच्चों और बड़े सहित युवा लोगों को असुविधा के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है।
कोरोना वायरस जैसी गंभीर महामारी की रोकथाम को लेकर 22 मार्च से समूचे देश सहित जिले में लागू किए गए लाॅकडाउन के चलते जिले में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में कमी आने के साथ ही वातावरण में भी शुद्धता आई है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सदस्य सचिव पी संगीता के मुताबिक जनवरी, फरवरी एवं 21 मार्च तक की तुलना में 22 मार्च से 3 अप्रैल तक लाॅकडाउन के इन 13 दिनों में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 7 गुना की कमी आई है। 21 दिन के लाॅकडाउन के बीच शहरवासियों के लिए एक राहतभरी खबर ये है कि शहरवासियों को शुद्ध हवा मिलने लगी है। इसका प्रमुख कारण यह है कि जहरीला प्रदूषण उगलने वाली यहां की 6 अंतरराष्ट्रीय सीमेंट कंपनियां भी अभी बंद हैं।
साथ ही नगर में वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगी हुई है जिससे 22 मार्च से 3 अप्रैल तक 13 दिनों में यहां सड़क दुर्घटना के महज 3 मामले ही सामने आए हैं वहीं शहर की हवा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 76 है जो आम दिनों में 100 से 120 के आसपास रहता है। औद्योगिक हब के रूप में पहचान बना चुके बलौदाबाजार प्रदूषण व दुर्घटनाओं के लिए भी भी चर्चा में रहता है मगर अभी दोनों में भारी कमी आई है।
जिले में 6 सीमेंट कंपनियां है जिसमें 24 घंटे प्रोडक्शन होने के कारण वे जहरीला धुआं उगलती रहती थीं। मगर इतने सालों में पहली दफा ऐसा हुआ है जब सभी सीमेंट कंपनियां बंद हैं। इसके अलावा इन कंपनियों में कच्चा माल, मशीनें पहुंचाने व तैयार माल बाहर भेजने के लिए दिन-रात भारी गाड़ियों की आवाजाही भी बंद है, जिससे प्रदूषण फैलता था।
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