Sandes and Samvad are Indian version of WhatsApp, MeITY tested both app in their beta stage – Exclusive: WhatsApp को हिन्दुस्तानी जवाब – देशी चैटिंग ऐप Sandes और Samvad बना रही सरकार!

Exclusive: WhatsApp को हिन्दुस्तानी जवाब - देशी चैटिंग ऐप 'Sandes' और 'Samvad' बना रही सरकार!

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “ये ऐप पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह व्हाट्सएप की तरह एक त्वरित संदेश सेवा ऐप है.”

नई दिल्ली:

दुनियाभर में मशहूर मैसेजिंग ऐप Whatsapp पर प्राइवेसी को लेकर बढ़ते विवाद के बीच, केंद्र सरकार मैसेजिंग ऐप का अपना देशी वर्जन बना रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeITY) के सूत्रों ने एनडीटीवी को इस बात की पुष्टि की है कि ऐसे दो ऐप का परीक्षण बीटा चरण में किया जा रहा है. उनका नाम Samvad और Sandes रखा गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ “वार्तालाप” और “संदेश” है.

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मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “ये ऐप पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह व्हाट्सएप की तरह एक त्वरित संदेश सेवा ऐप है.” NDTV को यह भी पता चला है कि सरकार GIMS- सरकारी इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस नामक एक अलग ऐप के लिए भी योजना बना रही है – जिसका इस्तेमाल सिर्फ भारत सरकार के कर्मचारी आपसी संवाद के लिए करेंगे.

सूत्रों ने कहा, “सरकार के भीतर यह आवश्यकता बहुत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि हमारी अपनी स्वतंत्र और स्व-स्वामित्व वाली त्वरित संदेश सेवा ऐप हो. इसलिए इन ऐप्स को डेवलप करने की प्रक्रिया मौजूदा व्हाट्सएप विवाद से काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी.” उन्होंने कहा, “इस ऐप का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे डेटा की चोरी नहीं हो सकेगी और बड़ी तकनीकी कंपनियों की तरह उसका व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं हो सकेगा.”

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हालांकि, लोगों के बीच इसकी स्वीकार्यता को तभी देखा जा सकता है, जब इसे सार्वजनिक तौर पर लागू किया जाएगा. इस बीच अभी ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि सरकार दोनों samvad और Sandes को इस्तेमाल में लाएगी या फिर उनमें से केवल एक ही उपयोगी होगा. सूत्रों ने बताया कि बीटा परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे.

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फिलहाल कुछ लोगों के परीक्षण के लिए Sandes ऐप ऐप्पल स्टोर पर उपलब्ध है. इसके लोगो में नीले और सफेद इंटरफ़ेस के साथ अशोक चक्र है. फिलहाल यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही अधिकृत और सत्यापित कर रहा है. सूत्रों ने कहा, “यह पूरी तरह से संभव हो सकता है कि इनमें से एक ऐप सरकारी कर्मचारियों की आंतरिक इस्तेमाल के लिए बना रह जाए और वह आम जनता के लिए नहीं हो.” बता दें कि हाल के दिनों में गोपनीय नीति में बदलाव लाने की वजह से व्हाटसएप आलोचनाओं का शिकार हुआ है.

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