SC का बड़ा फैसला, प्राइवेट अल्पसंख्यक संस्थानों में भी NEET के जरिए होगा एडमिशन – Supreme court neet uniform entrance exam not violate minority rights institutions

  • कोर्ट ने कहा- NEET से नहीं होता है अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन
  • सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए संसद ने बनाया है कानूनः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. बुधवार को शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET) अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती है. नीट से अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक संस्थान चलाने और शिक्षा देने के अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है.

जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा कि संसद ने जनहित में नीट को लागू किया है. नीट का मकसद सिस्टम की खामियों को दूर करना और गड़बड़ी को खत्म करना है. सुप्रीम कोर्ट ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर समेत अन्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में किसी तरह का दखल नहीं देता है. लिहाजा नीट संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(G), 25, 26, 29 (1) और अनुच्छेद 30 का किसी भी तरह उल्लंघन नहीं करता है.

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट और रेगुलेशन के प्रावधान संविधान में दिए गए अधिकारों को नहीं छीनते हैं. दरअसल, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर समेत अन्य ने नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी और अपने यहां अंडर ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश के लिए खुद टेस्ट कराने की इजाजत मांगी थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एमबीबीएस, एमडी, बीडीएस और एमडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए निजी सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक कॉलेजों में नीट लागू होगी. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नीट लागू किया जाना मेरिट की पहचान, चयन और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. वर्तमान समय में शिक्षा चैरिटी के वास्तविक रूप से अलग हो गई है, यह मात्र एक वस्तु बनकर रह गई है.

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अदालत ने यह भी कहा कि सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए सरकार को सहायता प्राप्त या गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उपाय करने का अधिकार है.

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