मुरैना। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में डॉल्फिन की आबादी का आकलन करने और उनकी गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से आए 18 विशेषज्ञों की टीम के मार्गदर्शन में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया गया है।जानकारी के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को घड़ियाल पुनर्वास केंद्र, देवरी में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डॉल्फिन सर्वेक्षण का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक दो मोटर बोट की मदद से चंबल नदी में नगर से पचनदा तक सर्वे किया गया। अब 16 अक्टूबर से यमुना नदी में सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है।आधुनिक उपकरणों से होगी डॉल्फिन की निगरानीडॉल्फिन की उपस्थिति और उनकी आबादी का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए एफ-पॉड (F-PODs) और ए-टैग (A-tags) जैसे ध्वनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। ये उपकरण डॉल्फिन की इकोलोकेशन क्लिक और अन्य ध्वनि संकेतों को रिकॉर्ड करने में मदद करते हैं। इसके अलावा जीपीएस, लेजर रेंजफाइंडर और दूरबीन की सहायता से डॉल्फिन की मौजूदगी, दूरी और भौगोलिक स्थिति दर्ज की जा रही है।पानी की गुणवत्ता और नदी की गहराई का भी अध्ययनडॉल्फिन के प्राकृतिक आवास की स्थिति जानने के लिए वाईएसआई प्रो डीएसएस (YSI ProDSS) उपकरण से जल की गुणवत्ता का आकलन किया जा रहा है। चार्ट प्लॉटर और डेप्थ साउंडर से नदी की गहराई, प्रवाह मार्ग और नदी तल की संरचना का अध्ययन किया जा रहा है। वहीं, पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) सैंपलिंग के जरिए डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों की उपस्थिति के संकेत तलाशे जा रहे हैं। प्लवक जाल की मदद से नदी में प्लवकों की विविधता और वितरण का भी आकलन किया जा रहा है।डॉल्फिन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है सर्वेक्षणइस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य डॉल्फिन की आबादी, उनके वितरण और प्राकृतिक आवास से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े एकत्रित करना है। सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी डॉल्फिन संरक्षण, नदी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन और जलीय जैव विविधता की सुरक्षा के लिए उपयोगी होगी। सर्वेक्षण पूरा होने और आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही डॉल्फिन की संख्या और उनके वितरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


