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Home Politics Shiv Sena Leader Sanjay Raut Said If Nda Government Is Formed In 2019 Shiv Sena Akali Dal And Other Major Allies Will Have A Role Rt | शिवसेना नेता संजय राउत बोले- NDA की सरकार बनने पर शिवसेना और अकाली दल का होगा अहम रोल

Shiv Sena Leader Sanjay Raut Said If Nda Government Is Formed In 2019 Shiv Sena Akali Dal And Other Major Allies Will Have A Role Rt | शिवसेना नेता संजय राउत बोले- NDA की सरकार बनने पर शिवसेना और अकाली दल का होगा अहम रोल

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शिवसेना नेता संजय राउत ने गठबंधन के मुद्दे पर बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘अगर 2019 में एनडीए की सरकार बनती है तो शिवसेना, अकाली दल और बाकी बड़े सहयोगियों का एक अहम स्थान होगा.’

राउत ने कहा, ‘एनडीए में शामिल सभी पार्टियां अपने राज्य में मजबूत हैं. अगर आप उनसे केंद्र में गठबंधन करना चाहते हो तो उनके राज्य में सीएम उनकी पार्टी का होना चाहिए.’

हाल के दिनों में शिवसेना नेता संजय राउत का दिल्ली में चंद्रबाबू नायडू के उपवास में शामिल होकर उन्हें समर्थन जताना और बंगाल की ममता बनर्जी की बात का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई का इस्तेमाल विरोधियों के खिलाफ करने का आरोप लगाने का मतलब क्या निकाला जाए, कि तकरीबन 30 साल पुराना बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन अब अंतिम सांसें गिन रहा है?

वैसे बीजेपी साल 2014 अक्टूबर में विधानसभा का चुनाव शिवसेना के बगैर लड़ी थी लेकिन महाराष्ट्र चुनाव के रिजल्ट के बाद दिसंबर में दोनों पार्टियों ने मिलकर वहां सरकार बनाई. ऐसे में शिवसेना लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ लड़ेगी या फिर गठबंधन से बाहर निकल लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी? यह एक बड़ा सवाल है.

गठबंधन में रोड़ा कहां अटका है?

बीजेपी फिलहाल 50-50 फीसदी सीटों पर चुनाव लड़ने का फॉर्मूला देकर गठबंधन कायम रखना चाह रही है लेकिन शिवसेना महाराष्ट्र में बड़े पार्टनर की भूमिका चाहती है. शिवसेना जानती है कि महाराष्ट्र यूपी के बाद सबसे बड़ा राज्य है जहां 48 लोकसभा सीटें हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी और शिवसेना 41 सीट जीत पाने में कामयाब हुए थे इसलिए महाराष्ट्र बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है.

शिवसेना बिहार की तर्ज पर सीटों का बंटवारा चाहती है, जहां दोनों पार्टी के बीच बराबरी का बंटवारा हो और राज्य की सत्ता की कमान हर हाल में शिवसेना के हाथों होगा, इसको लेकर पहले ही सहमति हो जाए. जाहिर है, दोनों पार्टियां एक-दूसरे के बगैर चुनाव में जाने का नुकसान समझती हैं लेकिन इसको लेकर किस हद तक समझौता किया जाए वो सीमा तय होता दिखाई नहीं पड़ रहा है.

समय बेहद कम है और शिवसेना प्रधानमंत्री के खिलाफ राफेल से लेकर राम मंदिर जैसे मुद्दे पर लगातार हमले कर रही है.

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