मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है और मंत्रिमंडल में फेरबदल से लेकर कैबिनेट विस्तार तक की चर्चाएं ज़ोर पकड़ने लगी हैं। खासतौर पर दो कद्दावर मंत्रियों—कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह—को लेकर अटकलें तेज हैं।दरअसल, गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले झंडारोहण की आधिकारिक सूची से वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम गायब रहना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। बीजेपी संगठन और सरकार में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, ऐसे में इस सूची से नाम हटने को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से अधिक राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर इसे नेतृत्व की नाराज़गी या जिम्मेदारियों में संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं, दूसरी ओर मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली कड़ी फटकार ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद विपक्ष हमलावर है और मंत्री पद से इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सरकार की छवि पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़ा फैसला लिया जा सकता है।सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री मोहन यादव मंत्रिमंडल के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पार्टी नेतृत्व नए चेहरों को मौका देने और संगठन व सरकार के बीच बेहतर संतुलन बनाने पर भी विचार कर रहा है। कुछ विधायकों के नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में हैं, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में कटौती या बदलाव संभव बताया जा रहा है।
इसके साथ ही बीजेपी के अंदरूनी सियासी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। संगठन और सरकार के बीच तालमेल, क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा सकते हैं।कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की राजनीति इस वक्त बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि क्या वास्तव में दो दिग्गज मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है या यह महज राजनीतिक अटकलें हैं।