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Sinking Country: खत्म होने जा रहा इस देश का अस्तित्व, समंदर में हो जाएगा लुप्त; आबादी को शरण देगा भारत का ‘दोस्त’

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Sinking Country: खत्म होने जा रहा इस देश का अस्तित्व, समंदर में हो जाएगा लुप्त; आबादी को शरण देगा भारत का ‘दोस्त’

Why is Tuvalu Country Sinking: आपने रोजगार या बेहतर आजीविका की तलाश में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पलायन करते हुए सुना होगा. लेकिन अगर आपको पता चले कि एक पूरे देश की आबादी ही अब अपना मुल्क छोड़कर दूसरे देश में बसने जा रही है. ऐसा करने के लिए दूसरे देश ने भी अनुमति दे दी है तो आप दंग रह जाएंगे. लेकिन यह सच है. प्रशांत महासागर में बसा एक छोटा सा द्वीपीय देश, तुवालु, दुनिया में पहली बार पूरे देश के नियोजित प्रवासन की तैयारी कर रहा है.

समुद्र में डूबने जा रहा ये नन्हा मुल्क!

वायर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वीपीय देश तुवालु समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण जलमग्न होने की कगार पर है. आशंका जताई जा रही है कि अगले कुछ सालों में यह देश पूरी तरह समुद्र में डूब सकता है. ऐसे में इस देश में रहने वाले लोगों के अभूतपूर्व योजनाबद्ध प्रवासन की जरूरत महसूस की जा रही है. चूंकि तुवालु की ऑस्ट्रेलिया के साथ एक पुरानी संधि है, जिसके तह हर साल 280 तुवालुवासियों को वहां पर स्थायी नागरिकता हासिल करने और जरूरी सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त करने की अनुमति है. ऐसे में इस देश के समूचे निवासियों को ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट करने की योजना बन रही है. 

तुवालु की कुल आबादी कितनी है?

रिपोर्ट के मुताबिक, तुवालु की कुल आबादी महज 11 हजार के करीब है. इसमें 9 प्रवाल द्वीप और एटोल हैं. इस द्वीपीय देश की समुद्र तल से औसत ऊंचाई महज 2 मीटर है. इसके 2 प्रवाल दीप पहले ही समुद्र में डूब चुके हैं. जलवायु परिवर्तन, लगातार आने वाले तूफान और बाढ़ की वजह से अब बाकी बचे प्रवाल द्वीपों के भी जलमग्न होने की आशंका बढ़ती जा रही है. 

कई स्टडी में इस बात का अंदेशा जताया गया है कि 25 वर्षों के भीतर तुवालु की अधिकतर भूमि जलमग्न हो सकती है. ऐसे में जीवित रहने के लिए लोगों को अभी से दूसरे इलाकों में जाना ही होगा. यह द्वीपीय देश पृथ्वी पर सबसे ज्यादा जलवायु संकटग्रस्त देशों में से एक है.

80 साल में गायब हो सकता है देश!

रिपोर्टों के अनुसार, 2050 तक तुवालु की अधिकांश भूमि और बुनियादी ढांचा समुद्र में डूब सकता है. वैज्ञानिकों को यह भी डर है कि अगले 80 वर्षों में यह द्वीपीय देश पूरी तरह निर्जन हो सकता है. तुवालु का सबसे नजदीकी और बड़ा देश ऑस्ट्रेलिया है. दोनों मुल्कों ने 2023 में फलेपिली संघ संधि नाम से अहम समझौता किया था.

इस संधि में एक जलवायु प्रवास कार्यक्रम का चैप्टर भी शामिल है. जिसके तहत हर साल 280 तुवालुवासियों को ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास की अनुमति दी जाएगी. इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास और नौकरियों में पूर्ण अधिकार भी प्रदान किए जाएंगे.

इस साल 4 प्रतिशत लोग छोड़ देंगे मुल्क

यह संधि होने के बाद इस साल 280 तुवालु वासियों का पहला जत्था अपने डूबते मुल्क को छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में बसने जा रहा है. इसके लिए आवेदनों का पहला चरण इस साल 16 जून से 18 जुलाई तक चला. तुवालु स्थित ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में बसने के लिए 8,750 पंजीकरण हुए. इनमें परिवार के सदस्य भी शामिल थे. इसके बाद 280 प्रवासियों का चयन 25 जुलाई को लॉटरी के जरिए किया गया. 

सभी को ऑस्ट्रेलिया में रहने का मिलेगा मौका

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि इस प्रवासन कार्यक्रम से तुवालु के लोगों को पूरे सम्मान के साथ ऑस्ट्रेलिया में बसने का अवसर मिलेगा. ऐसा करके हर साल तुवालु की 4 प्रतिशत आबादी ऑस्ट्रेलिया के लिए पलायन कर सकती है. जबकि दस सालों में 40 फीसदी आबादी अपना देश छोड़ सकती है. 


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