जिनेवा: अफ्रीकी देशों (African Countries) की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए बड़े पैमाने पर होने वाली कर और पूंजी चोरी जिम्मेदार है. संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास एजेंसी (UN Trade and Development Agency – UNCTAD) के एक अध्ययन में सामने आया है कि कर और पूंजी चोरी के चलते अफ्रीका (Africa) को हर साल लगभग $89 मिलियन का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अध्ययन के अनुसार, इस सदी के पहले 15 वर्षों में अफ्रीका से पूंजी का अवैध आउटफ्लो (Illegal Outflows of Capital) $830 बिलियन से अधिक था, इसका अधिकांश हिस्सा सोने, हीरे और प्लेटिनम जैसी उच्च-मूल्य वालीं वस्तुओं की तस्करी से जुड़ा था. जिसके चलते महाद्वीप की सरकारों की स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी सेवाएं प्रदान करने की क्षमता प्रभावित हुई.
हित हो रहे प्रभावित
2013 से 2015 तक, इस तरह का आउटफ्लो औसतन प्रति वर्ष लगभग $89 बिलियन तक बढ़ गया. जबकि इस तीन साल की अवधि के दौरान अफ्रीका द्वारा प्राप्त आधिकारिक विकास सहायता और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, दोनों की कुल राशि सालाना औसतन 102 बिलियन डॉलर थी.
UNCTAD के प्रधान सचिव मुखिसा कित्युई (Mukhisa Kituyi) ने कहा कि अवैध वित्तीय प्रवाह अफ्रीका और उसके लोगों के हितों को प्रभावित करते हैं, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को कम करते हैं और अफ्रीकी संस्थानों के प्रति अविश्वास उत्पन्न करते हैं.
असल आंकड़ा कहीं ज्यादा
एजेंसी ने कहा कि 2000 और 2015 के बीच अफ्रीका से कुल 836 बिलियन डॉलर की पूंजी अवैध रूप से देश के बाहर गई. 2015 में इसमें सबसे बड़ा हिस्सा एक्स्ट्रेक्टिव कमोडिटीज का था. इसके बाद सीना, हीरा और प्लैटिनम का नंबर आता है. एजेंसी का यह भी कहना है कि असल आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है.
#IllicitFinancialFlows rob Africa of $89 billion each year, says @UNCTAD’s Economic Development in Africa Report 2020.
Curbing this capital flight could cut almost in half the continent’s #GlobalGoals financing gap, https://t.co/55eYKoPfW0 #UNCTADEDAR pic.twitter.com/8tgkJiNpbc
— UNCTAD (@UNCTAD) September 28, 2020
…तो बदल सकती है स्थिति
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी का कहना है कि यदि इस तरह के गैरकानूनी आउटफ्लो पर रोक लगाने के लिए कदम उठाये जाते हैं, तो अफ्रीकी देशों की सरकारों को सड़क, रेलमार्ग, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश के लिए पूंजी की समस्या का सामना नहीं करना होगा. गौरतलब है कि कई अफ्रीकी देश बदहाल आर्थिक स्थिति से गुजर रहे हैं. उनके पास बुनियादी सेवाओं के लिए पर्याप्त धन नहीं है.

