शुल्क पूरी लिया, डिग्री भी दी पर रजिस्ट्रेशन में अटका पेच.37 स्टूडेंट्स का डॉक्टर बनने का रास्ता सिस्टम ने रोका..

बालाघाट स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले एस.एम.डीओ. होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के 37 छात्र पिछले कई महीनों से अपने भविष्य को लेकर दर-दर भटक रहे हैं.. वर्ष 2017-18 में सरकारी प्रक्रिया के तहत प्रवेश लेने वाले इन छात्रों ने साढ़े पांच साल की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी कर 2023 में डिग्री तो हासिल कर ली, लेकिन अब स्थायी रजिस्ट्रेशन न मिलने के कारण उनका करियर पूरी तरह ठप हो गया है.

छात्रों का कहना है कि उन्होंने 8 से 10 लाख रुपये खर्च कर इस कोर्स को पूरा किया है.. कई विद्यार्थियों ने इसके लिए बैंक से लोन लिया है.. प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद जब स्थायी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया, तो पोर्टल पर उसे ‘पेंडिंग’ दिखाया गया.. कॉलेज प्रबंधन ने पहले दिसंबर तक का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में पता चला कि मामला कोर्ट में है.. रजिस्ट्रेशन न होने के कारण छात्र न तो अपनी क्लीनिक शुरू कर पा रहे हैं और न ही सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन कर पा रहे हैं.. सबसे बड़ी बाधा पोस्ट ग्रेजुएशन के दाखिले में आ रही है, जहाँ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है..

हताश छात्रों ने हाल ही में क्षेत्रीय विधायक अनुभा मुंजारे से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई.. विधायक मुंजारे ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह संस्थान पहले भी कई विवादों में रहा है और यहाँ की अनियमितताओं की शिकायतें अक्सर मिलती रहती हैं..यह 37 बच्चों के भविष्य का सवाल है.. सरकारी प्रक्रिया से एडमिशन होने के बावजूद छात्रों को छह साल बाद भी भटकना पड़ रहा है, यह बेहद निंदनीय है..

मैं इस पूरे मामले को आगामी विधानसभा सत्र में उठाऊँगी ताकि दोषियों पर कार्यवाही हो और छात्रों को न्याय मिले..6 साल की कड़ी मेहनत और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी हाथ में रजिस्ट्रेशन न होना छात्रों के मानसिक और आर्थिक तनाव का कारण बना हुआ है..अब देखना यह है कि प्रशासन और शासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और इन भविष्य के डॉक्टरों को कब तक राहत मिलती है..

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