जीवन के अंतिम सफर में पानी और कीचड़ से भरी राह

शुजालपुर-जीवन के अंतिम सफर में पानी और कीचड़ से भरी राह,देखिए विकास के दावों की हकीकतजीवन का अंतिम सफरपानी और कीचड़ से भरी राह बेकड्राप कहते है मौत के बाद जीवन के सभी संघर्षों से मुक्ति मिल जाती है,इंसान चैन से अपने जीवन के अंतिम सफर पर निकल जाता है। लेकिन इस अंतिम सफर की यात्रा भी मुश्किल हो जाए तो आप क्या कहेंगे। जी हां कुछ ऐसी ही तस्वीर शाजापुर जिले के मऊघाट से आई है,जहां गांव से मुक्तिधाम के लिए सड़क नहीं है,और ग्रामीण पानी और कीचड़ से भरे कच्चे रास्ते से गुजर कर मुक्तिधाम तक पहुंचते है।

आप अपनी स्क्रिन पर पानी और कीचड़ के बीच गुजरती जिस शवयात्रा की तस्वीर देख रहे है,ये है शाजापुर जिले के मऊघाट गांव की,जो शुजालपुर में महज 6 किलोमीटर दूर है,जो प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की विधानसभा मंक आता है। बावजूद आज भी ग्रामीण गांव से मुक्तिधाम तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है,आज भी ग्रामीण पानी और कीचड से सराबोर इस सडक से मुक्तिधाम तक शवयात्रा लेकर जाते है,हालांकि गांव से मुक्तिधाम तक सड़क के लिए ग्रामीणों ने पंचायत से लेकर मंत्रीजी को अवगत कराया लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला,जिसके चलते अब ग्रामीणों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

-प्रदेश सरकार इस समय अपना जनकल्याण पर्व मना रही है,जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में एक के बाद एक सौगात दी जा रही है बल्कि ग्रामीणों की समस्या का निराकरण भी किया जा रहा है,ऐसे में देखना होगा की आखिर मऊघाट के ग्रामीणों की समस्या का निराकरण कब तक होता है। मुश्किलों से भरा जीवन का अंति सफर पानी और कीचड़ के बीच से अंतिम यात्रा जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप आखिर कब मिलेगी सड़क की सौगात ?

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