June 30, 2020

There was a lot of hope from the Prime Minister, but Khoda Pahad, Nikli chuhiya: Congress – प्रधानमंत्री से बहुत उम्मीद थी, लेकिन खोदा पहाड़, निकली चुहिया : कांग्रेस

प्रधानमंत्री से बहुत उम्मीद थी, लेकिन खोदा पहाड़, निकली चुहिया : कांग्रेस

पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि आज देश को प्रधानमंत्री से बहुत उम्मीद थी, पर एक बार फिर उन्होंने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. हमें उम्मीद थी कि वे कोरोना के संकट के खिलाफ एक निर्णायक कदम लेंगे. हमें उम्मीद थी कि वे आर्थिक मंदी के खिलाफ एक निर्णायक कदम लेंगे. हमें उम्मीद थी कि वे करोड़ों लोग जो अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने से अपनी नौकरी खो बैठे हैं उनके लिए एक निर्णायक कदम लेंगे. हमें उम्मीद थी कि वह उन लोगों को कुछ राहत पहुंचाएंगे जिनके वेतन में भारी कटौती हुई है. लेकिन खोदा पहाड़ निकली चुहिया. 

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पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी कहते हैं हम अच्छी स्थिति में है. देश में कोरोना के कुल मामले 5.67 लाख हैं. जून में पूरे विश्व में भारत में कोरोना फैलने की दर सबसे ऊंची रही. विश्व में हम चौथे स्थान पर हैं. प्रति दिन  करीब 20,000 नए मामले सामने आ रहे हैं. टेस्ट पॉजिटिव रेट 11.4% है. टेस्टिंग अभी भी 5 सबसे ज़्यादा मामलों वाले देशों में हमारे यहां सबसे कम हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इतने प्रचार प्रसार के बावजूद, श्री नरेंद्र मोदी ने अपने 17 मिनट के लंबे भाषण में मात्र एक प्रशासनिक निर्णय लिया. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर तक बढ़ाया जाएगा. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि योजना के विस्तार का सुझाव कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में दिया था. लेकिन इस घोषणा से दो अन्य बड़े निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं – पीएम को कोरोना का प्रभाव नवंबर तक रहने की आशंका है और चाहे कोई भी आपदा देश में हो या खतरा चीन से हो उनके लिए प्रथम प्राथमिकता बिहार के चुनाव हैं जैसा कि उनके विभिन्न संदर्भों से स्पष्ट हो गया. लेकिन अनाज योजना के मात्र विस्तार से समस्या का समाधान नहीं होगा. लोगों को दाल, सब्ज़ी, दूध, दवाई के लिए भी तो पैसे चाहिए, इसीलिए बिना नगद ट्रांसफर के किसी का भला नहीं होगा न ही अर्थव्यवस्था दोबारा से पटरी पर आएगी.

उन्होंने कहा कि आज भी सरकार और मोदी जी स्वयं स्थिति की गम्भीरता को या तो समझने में असमर्थ हैं या जानबूझकर कर सुर्ख़ियां बटोरने के चक्कर में अनदेखा कर रहे हैं. भाजपा को इस मानसिकता को त्यागना होगा और पूरी ईमानदारी से महामारी, आर्थिक मंदी और चीन से पुरज़ोर तरीक़े से लड़ना होगा. ज़बानी जमा खर्च करने का समय समाप्त हो चुका है.


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