उसने पहले तो मौके पर मौजूद मजदूरों से कुल्हाड़ी जप्त कर वन अधिनियम के तहत मामला बनाया.
दरअसल पूरा मामला बांकीमोंगरा (Bankimongra) स्थित हल्दीबाड़ी बीट का है. यहां कटघोरा परिक्षेत्र के रेंजर मृत्युंजय सिंह द्वारा 16 जुलाई को हल्दीबाड़ी स्थित बांस बाड़ी में 11 मजदूरों को लाकर 353 नग बांसों की कटाई करवा दी गई.
दरअसल पूरा मामला बांकीमोंगरा स्थित हल्दीबाड़ी बीट का है. यहां कटघोरा परिक्षेत्र के रेंजर मृत्युंजय सिंह द्वारा 16 जुलाई को हल्दीबाड़ी स्थित बांस बाड़ी में 11 मजदूरों को लाकर 353 नग बांसों की कटाई करवा दी गई. बांस की कटाई के वक़्त वहां का बीट गार्ड शेखर रात्रे विभागीय आदेश पर मरवाही ट्री गार्ड लेने गया हुआ था. शुक्रवार की सुबह जब शेखर रात्रे वापस अपने कार्य स्थल पर पहुंचा तो मौके पर बांस की कटाई के लिए मजदूर बांस बाड़ी में पहुंचे हुए थे. बिना किसी वैधानिक आदेश के बांस की कटाई किये जाने को लेकर बीट गार्ड गुस्से में आ गया.
मजदूरों से कुल्हाड़ी जप्त कर वन अधिनियम के तहत मामला बनाया
उसने पहले तो मौके पर मौजूद मजदूरों से कुल्हाड़ी जप्त कर वन अधिनियम के तहत मामला बनाया. और फिर मौके पर बीच बचाव करने पहुचे रेंजर मृत्युंजय सिंह के साथ भी जमकर बहस हो गयी. बीट गार्ड शेखर रात्रे ने रेंजर से जब बांस कटाई करने की जानकारी चाही गई तो रेंजर ने डी एफओ के कहने पर बांस की विभागीय कार्य के लिए बांस की कटाई किए जाने की जानकारी दी गई. लेकिन लिखित आदेश मांगे जाने पर रेंजर मृत्युंजय सिंह बीट गार्ड को कुछ भी नहीं दिखा सका. बस फिर क्या था बीट गार्ड शेखर ने रेंजर मृत्युंजय सिंह को भी अवैध बांस कटाई करने का आरोपी बना दिया. पंचनामा में हस्ताक्षर करने को लेकर बीट गार्ड और रेंजर के बीच जमकर तू-तू मैं- मैं हो गया. अब ऐसे में ये देखने वाली बात होगी कि अगर बांस की कटाई अवैध तरीके से करवाई जा रही थी तो इस पूरे मामले में किस पर गाज गिरती है.


