मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ शहर में केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद डॉ. वीरेंद्र खटीक के घर के पास एक पॉलीबैग में लगभग 50 वोटर आईडी कार्ड मिलने के मामले में एक नया मोड़ आया है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, खासकर ऐसे समय में जब देश में वोट चोरी और फर्जीवाड़े को लेकर पहले से ही बहस चल रही है।
सांसद प्रतिनिधि विवेक चतुर्वेदी ने इस घटना को केंद्रीय मंत्री को बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के पड़ोसी, जो स्वास्थ्य विभाग के एक सरकारी कर्मचारी हैं, ने जानबूझकर ये वोटर आईडी कार्ड उनके घर के पास फेंके हैं। चतुर्वेदी का दावा है कि उनके पास इसका सबूत सीसीटीवी फुटेज के रूप में मौजूद है, हालांकि मीडिया को उपलब्ध कराए गए फुटेज में यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है कि कोई व्यक्ति वोटर आईडी कार्ड फेंक रहा है। फुटेज में केवल एक महिला को घर के बाहर कुछ कचरा फेंकते हुए देखा जा सकता है।
दूसरी ओर, प्रशासन ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। टीकमगढ़ के तहसीलदार सतेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि ये वोटर आईडी कार्ड साल 2011 के हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन शाखा द्वारा इनकी जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है: इतनी बड़ी संख्या में ये पुराने वोटर आईडी कार्ड कहाँ से आए? क्या इनका दुरुपयोग किया गया था और किसने किया? और सबसे महत्वपूर्ण, ऐसे संवेदनशील समय में केंद्रीय मंत्री के घर के पास इस तरह के संदिग्ध दस्तावेज मिलना कई तरह के संदेह पैदा करता है। इस मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।