पाकिस्तान और सऊदी अरब ने हाल ही में एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते (Strategic Mutual Defense Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, दोनों देशों पर किसी भी बाहरी हमले को दोनों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता दशकों से चले आ रहे दोनों देशों के अनौपचारिक सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देता है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि इस समझौते के अनुसार, पाकिस्तान के पास जो कुछ भी है—जिसमें उसकी परमाणु क्षमता भी शामिल है—वह सब सऊदी अरब के लिए उपलब्ध होगा। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से सऊदी अरब को अपनी परमाणु सुरक्षा देने की बात कही है।कई विश्लेषक इस समझौते को इज़रायल के विरुद्ध एक कदम मान रहे हैं।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इज़रायल के सैन्य अभियानों के कारण खाड़ी देशों में तनाव बढ़ रहा है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए किया गया है।इस समझौते का भारत पर भी असर पड़ने की संभावना है। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस समझौते के प्रभावों का मूल्यांकन करेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।