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Home states Chhattisgarh कुदरत का अनमोल तोहफा! जंगलों में खुद उगती ‘वन रमकेलिया’, स्वाद और सेहत का खजाना

कुदरत का अनमोल तोहफा! जंगलों में खुद उगती ‘वन रमकेलिया’, स्वाद और सेहत का खजाना

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छत्तीसगढ़ के जंगलों में पाई जाने वाली ‘वन रमकेलिया’ भिंडी अपनी अनोखी स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है. आदिवासी इलाकों में इसे पारंपरिक भोजन और घरेलू औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है. यह पौधा बिना किसी देखरेख के प्राकृतिक रूप से उग जाता है. ‘वन रमकेलिया’ छत्तीसगढ़ की जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की अहम पहचान बन चुकी है.

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में पाई जाने वाली यह भिंडी इस सब्जी की जंगली प्रजाति है, जिसे स्थानीय लोग ‘वन रमकेलिया’ कहते हैं. इसकी खासियत यह है कि यह बिना किसी मानवीय देखरेख के जंगलों में अपने आप उग जाती है. बरसात और ठंड के मौसम में इसके पौधे बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं, जो जंगल की हरियाली में चार चांद लगा देते हैं.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में ‘वन रमकेलिया’ को बड़े चाव से खाया जाता है. इसकी फलियों से बनी सब्जी स्वाद में भले भिंडी जैसी हो लेकिन इसका अपना अलग मिट्टी का फ्लेवर होता है. गांवों में इसे परंपरागत व्यंजन के रूप में खास मौकों पर पकाया जाता है. पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे शरीर के लिए लाभदायक माना जाता है.

इस पौधे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे किसी रासायनिक खाद, दवा या सिंचाई की जरूरत नहीं होती. यह जंगल की मिट्टी और प्राकृतिक नमी में खुद-ब-खुद पनपता है. यही कारण है कि इसे प्राकृतिक खेती का उदाहरण भी कहा जाता है. जंगल के किनारे, नदी तट या झाड़ियों में यह सहज रूप से दिखाई दे जाता है.

इसकी फलियां देखने में तो बिल्कुल भिंडी जैसी लगती हैं लेकिन छूने पर यह थोड़ी मोटी और खुरदरी होती हैं. पकने के बाद इसका स्वाद हल्का कसैला और मिट्टी जैसा प्राकृतिक स्वाद देता है. यही स्वाद इसे अलग बनाता है. कुछ ग्रामीण इसे सुखाकर मसाले या पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.

आदिवासी जनजातियां इस पौधे को केवल भोजन नहीं बल्कि औषधि के रूप में भी पहचानती हैं. माना जाता है कि यह पेट के संक्रमण, पाचन संबंधी परेशानियों और त्वचा रोगों में लाभकारी होती है. पुराने समय में इसे जड़ी-बूटी के रूप में भी प्रयोग किया जाता था, जिससे यह स्थानीय चिकित्सा प्रणाली का हिस्सा बन गई है.

‘वन रमकेलिया’ सिर्फ एक पौधा नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक है. यह जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है और स्थानीय जीवनशैली से गहराई से जुड़ा हुआ है. आधुनिक समय में वैज्ञानिक भी इस जंगली भिंडी पर अनुसंधान कर रहे हैं ताकि इसके पौष्टिक और औषधीय गुणों को और बेहतर तरीके से समझा जा सके.

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