आयुर्वेदिक दवा के साइड इफेक्ट्स: does ayurvedic medicine have side effects expert reveals the truth – Ayurveda herbs के ‘साइड इफेक्ट’ नहीं होते कहने से पहले जान लें एक्सपर्ट की राय

स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद (Ayurveda) की प्राचीन औषधीय प्रणाली पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। आयुर्वेद का उद्देश्य रोग की रोकथाम करना और मन, आत्मा व शरीर के बीच संतुलन बनाना है। माना जाता है कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन एक अध्ययन में सामने आया है कि आयुर्वेद हर्बल दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से स्वास्थ्य खराब हो सकता है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के आर्टिकल में कहा गया है कि यह मिलावट और कुछ अंतनिर्हित विषाक्तता का कारण हो सकता है। बता दें कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उद्देश्य बीमारी को रोकने के बजाय बीमारी से बचाव करना है। हालांकि, कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की हाई डोज या इन्हें लंबे समय तक लेने से पेट में दर्द, दस्त, , मतली, उल्टी, एलर्जी जैसे कई साइड इफेक्ट दिख सकते हैं।

डॉ.रेखा राधामणि ने बताया आयुर्वेद कितना सुरक्षित है-

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विशेषज्ञ की सलाह से लें हर्बल दवाएं

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ.रेखा राधामणि ने आयुर्वेद के साइड इफेक्ट को लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि – ‘एलोपैथी की तरह आयुर्वेद हर्बल दवाएं भी बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के नहीं लेनी चाहिए। ये कई तरह से दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है’।

उन्होंने यह भी बताया कि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए जड़ी बूटी सर्पगंधा का उपयोग अवसाद का कारण भी बन सकता है।

​क्या आयुर्वेद दवाएं सुरक्षित हैं?

अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो ज्यादातर ये सोचकर आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग करते हैं कि इससे कोई नुकसान नहीं होता, तो आपको सावधान होने की जरूरत है।

आयुर्वेदिक दवाईयां सुरक्षित है कि नहीं? इस पर डॉ.राधामणि कहती हैं कि इसका जवाब हां और ना दोनों है। कुछ जो हल्की जड़ी-बूटियां होती हैं, वे आपके लिए सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ जड़ी-बूटियां बहुत स्ट्रांग होती है, जो हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होती है।

सबके लिए फायदेमंद नहीं है ​’अश्वगंधा’

विशेषज्ञ कहती हैं कि अश्वगंधा एक बहुत ही जहरीली जड़ी बूटी है। अगर आप इसे बिना किसी डॉक्टर के सलाह के या मना करने के बावजूद लेते हैं, तो पीरियड्स इरेग्युलर हो सकते हैं।

​सिर्फ आयुर्वेद का लेबल देख न लें दवा

डॉ.राधामणि कहती हैं कि दुर्भाग्य से आुयर्वेदिक दवाओं पर भारत में एलोपैथी की दवाओं की तरह कड़े नियम नहीं है। ज्यादातर दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चें के काउंटर पर उपलब्ध हैं। इससे इन दवाओं को बिना सोचे समझे खरीदना और लेना भारी पड़ सकता है। बिना यह जाने कि ये आपके लिए सही है या नहीं, इनका सेवन नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।




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