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एमपी विधानसभा में बाहुबल होगा बैन!

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संसद की तर्ज पर धरना, प्रदर्शन पर रोक लगाने पर विचार

मनीष पाठक, भोपाल।मध्यप्रदेश विधानसभा में जल्दी ही विधायकों के बाहुबल यानी शक्ति प्रदर्शन पर रोक लग जाएगी। गृह और संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने संसद परिसर में संसद परिसर में धरना, प्रदर्शन, उपवास और धार्मिक क्रियाकलाप पर प्रतिबंध के आदेश की तारीफ करते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा में भी इसे लागू करने पर विचार करने का संकेत दिया है। बिहार और उत्तरप्रदेश में बाहुबली के मायने कुछ और हों, एमपी के गृहमंत्री की राय में विधानसभा में धरना, प्रदर्शन भी बाहुबल की श्रेणी में आता है।
संसद के मानसून सत्र से पहले राज्यसभा सचिवालय से जारी एक परिपत्र ने समूचे विपक्ष को खासा नाराज कर दिया था। इसमें संसद परिसर में धरना, प्रदर्शन, उपवास और धार्मिक क्रियाकलाप पर रोक लगाई गई है। कांग्रेस और अन्य दलों के सांसदों द्वारा इस पर कड़ा एतराज जताने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की सफाई भी इस पर आ गई है। संसद में भले ही यह मामला ठंडा पड़ गया हो, मध्यप्रदेश में इसकी आंच तेज हो गई है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस प्रतिबंध की तारीफ करते हुए भविष्य में मध्यप्रदेश विधानसभा में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार करने के संकेत दिए हैं… बकौल गृहमंत्री विधानसभा और संसद जैसे परिसर चर्चा के लिए हैं… जहां बाहुबल नहीं, बुद्धि कौशल का प्रदर्शन होना चाहिए… नरोत्तम ने बताया कि संसद के धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव अच्छा है, इसका अध्ययन हो रहा है। अभी पूरा अध्ययन होना है। मिश्रा के मुताबिक विधानसभा और संसद का फ्लोर संवाद और चर्चा के लिए मिला है। इनमें चर्चा होनी चाहिए, बाहुबल का प्रदर्शन नहीं।

संसदीय कार्यमंत्री के इस संकेत से कांग्रेस भड़क गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी की है। डॉ गोविंद सिंह ने कहा कि प्रदेश में चीन और जर्मनी जैसा कानून सरकार लागू करना चाहती है। जिससे कोई भी सरकार के खिलाफ आवाज न उठा सके। संविधान में सभी को आवाज उठाने का हक है। धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने का संविधान में कहीं कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रजातंत्र को समाप्त करना चाहती है। डॉ सिंह ने कहा कि सरकार चर्चा से बचने के लिए सत्र की अवधि भी घटाती जा रही है।

गांधी प्रतिमा के सामने विपक्ष देता है धरना

संसद की तरह ही मध्यप्रदेश विधानसभा में भी सत्तापक्ष के किसी प्रस्ताव से नाराज विपक्ष परिसर में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना,प्रदर्शन करता है। सदन के भीतर और परिसर में नारेबाजी भी होती है। जिसे विपक्ष अपना लोकतांत्रिक अधिकार मानता है। साल 2015 में ओला-पाला से खराब फसल का मुआवजा देने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायकों ने पूरी रात गर्भगृह में बैठकर धरना दिया था। इससे पहले दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान भाजपा विधायक भी देर रात तक गर्भगृह में धरना दे चुके हैं। प्रतिबंध लागू होने के बाद विधानसभा परिसर में सभी तरह के धरना और प्रदर्शन पर रोक लग जाएगी।

मानसून सत्र 13 सितंबर से
मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 13 से 17 सितंबर के बीच होगा। पहले यह सत्र 25 जुलाई से आहूत था, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव के चलते इसे स्थगित कर नई तारीख तय की गई है। विपक्ष को आशंका है कि मानसून सत्र के दौरान धरने पर प्रतिबंध लगाने संबंधी परिपत्र जारी हो सकता है।

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