सिडनी: ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने ब्लैक लाइव्स मैटर समर्थकों को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने कोरोना वायरस (Coronavirus) प्रतिबंध का उल्लंघन कर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. बता दें कि ऑस्ट्रेलिया (Australia) में भी उसके इतिहास को लेकर बहस छिड़ गई है और मुद्दा है गुलामी.
प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (Australian PM Scott Morrison) की उस टिप्पणी के बाद खासी आलोचना हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “ऑस्ट्रेलिया में गुलामी नहीं थी”. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया था कि यह “बहुत क्रूर था.”
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इतिहासकारों, आदिवासी कार्यकर्ताओं और कुछ सांसदों ने इस टिप्पणी पर शॉक और निराशा जताई है.
पूर्व संघीय कानूनविद और अब मोनाश विश्वविद्यालय में राजनीति के प्रोफेसर हैं शर्मन स्टोन ने कहा, “देश के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की दासता को अच्छी तरह से डॉक्यूमेंटेड किया गया है”. उन्होंने आगे कहा, “दासों ने मछली पकड़ने, देहाती उद्योगों और घरेलू श्रम के रूप में काम किया है.”
अमेरिका में शुरू हुए ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन ( black lives matter) ने ऑस्ट्रेलिया में भी स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के साथ दुर्व्यवहार पर ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें हिरासत में आदिवासियों की मौतें भी शामिल हैं.
विक्टोरिया राज्य के अधिकारियों ने गुरुवार को पुष्टि की कि COVID-19 के 8 नए मामलों में से एक गुरुवार को मेलबोर्न में सप्ताहांत की रैली में भाग लेने वाले एक व्यक्ति का था.
वहीं न्यू साउथ वेल्स के पुलिस कमिश्नर मिक फुलर ने 2GB रेडियो को बताया, “लोगों को स्थानांतरित करने के लिए हम अपनी सारी शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं. यदि लोग आगे नहीं बढ़ते हैं, तो उनको गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”
वहीं मॉरिसन ने श्वेत नेताओं की मूर्तियों को हटाने के लिए बढ़ती मांग को खारिज कर दिया, जिसमें देश के पहले प्रधानमंत्री, एडमंड बार्टन की मूर्ति भी शामिल है.
मॉरिसन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का प्रारंभिक उद्देश्य “उचित” था, लेकिन मूर्तियों को हटाने की मांग राजनीतिक एजेंडेे के तहत की जा रही थी.
बता देंं कि जब से कोविड-19 संकट शुरु हुआ है तब से पहली बार ये मंगलवार ऐसा दिन रहा जब ऑस्ट्रेलिया में कोविड-19 कोई सामुदायिक प्रसारण का मामला दर्ज नहीं हुआ. यहां अब तक 7,285 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 102 मौतें शामिल हैं.

