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नेपाल में ओली सरकार को बचाने में लगी चीनी राजदूत
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सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष ने कहा कि हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के आंतरिक कलह के नाम पर चीन की राजदूत की सक्रियता अब लोगों की नजर में खटकने लगी है. पार्टी के विभाजन को बचाने और ओली सरकार की उम्र बढ़ाने के लिए जिस तरह से काठमांडू में रही चीन की डिप्लोमेट होऊ यांकी की राष्ट्रपति भवन से प्रधानमंत्री निवास और असंतुष्ट नेताओं से लेकर सैनिक मुख्यालय तक की भागदौड़ हो रही है, उसे नेपाल के आंतरिक मामले में विदेशी हस्तक्षेप की संज्ञा दी जा रही है.
इस कड़ी में सबसे पहला विरोध सत्तारूढ़ दल के बड़े नेता की तरफ से ही आया है. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पांच बड़े नेताओं में एक नारायणकाजी श्रेष्ठ ने विदेशी राजदूत की सक्रियता की आलोचना की है. नेपाल सरकार में पूर्व विदेश मंत्री रहे श्रेष्ठ ने कहा कि इस तरह यदि नेपाल की आंतरिक राजनीति के आयाम को विदेशी शक्ति निर्देशित करती है तो इस षडयंत्र को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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फिलहाल सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सचिवालय सदस्य रहे और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका में रहे नारायणकाजी श्रेष्ठ ने अपने ट्विटर पर लिखा कि नेपाल एक सार्वभौम राष्ट्र है और हम अपना निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं. इसमें किसी भी प्रकार की कोई विदेशी हस्तक्षेप की कोई भी प्रवृति अस्वीकार है.
नेपाल के एक और पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा ने केपी शर्मा ओली पर व्यंग करते हुए चीनी राजदूत की सक्रियता को रिमोट कंट्रोल से पार्टी संचालन होने पर सवाल खडा किया है. थापा ने ट्वीट किया है कि प्रधानमंत्री ने तो भारतीय राजदूत पर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया था लेकिन यहां तो उसके विपरीत चीन की राजदूत उनकी पार्टी और सरकार दोनों बचाने के लिए घर-घर घूम रही हैं. क्या ऐसे रिमोट कंट्रोल से चलने वाली लोकतांत्रिक गणतंत्र नेपाल के हित में है?
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थापा ने आगे लिखा कि स्वाभिमान और स्वनिर्णय भी अगर हम नहीं कर सकते हैं तो इस देश को न तो बचा सकते हैं और न ही बना सकते हैं. नेपाली कांग्रेस के सांसद और पार्टी वर्किंग कमिटी के सदस्य धनराज गुरूंग ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए चीनी राजदूत की सक्रियता पर आरोप लगाया है.
गुरूंग ने ट्वीट कर कहा कि सरकार गिराने के लिए भारतीय राजदूत की सक्रियता का खुलासा प्रधानमंत्री ओली ने किया था लेकिन इसके ठीक विपरीत यहां तो सरकार बचाने के लिए चीनी राजदूत के घर-घर जाने की बात आ रही है. गुरूंग ने ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री की राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद पर व्यंग करते हुए कहा कि यदि सरकार गिराने और सरकार बचाने के लिए विदेशी राजदूतों की आवश्यकता है तो हमारी राष्ट्रीयता कहां चली गई है? अपनी कुर्सी बचाने के लिए राष्ट्रीयता की भी तिलांजलि दे दी गई है क्या?
साधी चुप्पी
नेपाल के प्रजातांत्रिक आंदोलन से जुड़े राजनीतिक विश्लेषक खगेन्द्र संग्रौला ने अपने ट्वीट में चीनी राजदूत की सक्रियता पर प्रधानमंत्री ओली की खामोशी को लेकर आशंका व्यक्त की है. उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री ओली ने भारतीय राजदूत के बारे में तो डंका पीट कर बताया था कि उनकी सरकार गिराने में वो सक्रिय हैं. लेकिन चीनी राजदूत की सक्रियता पर उन्होंने चुप्पी क्यों साध राखी है. दक्षिण पड़ोसी कुछ करे तो वो हस्तक्षेप और उत्तरी पड़ोसी कुछ भी षडयंत्र करे तो वो वरदान है क्या?
अब नेपाल की मीडिया और नेपाल के पत्रकार भी चीन की राजदूत की अस्वाभाविक सक्रियता पर सवाल खड़े कर रहे हैं. नेपाल की ऑनलाइन टेलीविजन नेपाल लाइव से आबद्ध पत्रकार पुष्पा केसी ने ट्वीट कर लिखा है कि भारतीय राजदूत की सक्रियता का हल्ला फैलाकर प्रधानमंत्री निवास में आंसू बहाने वाली चीन की राजदूत की सक्रियता को पार्टी के लिए उपकार मान कर खामोश है क्या? उन्होंने इसे नेपाली राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप की संज्ञा दी है.